तस्वीर में बाईं ओर शिवसेना महानगर प्रमुख प्रविण तिदमे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को दस्तावेज दिखाते हुए नजर आ रहे हैं।

नाशिक नगर निगम के मलेरिया (पेस्ट कंट्रोल) विभाग में वर्ष 1994 से कंत्राटी पद्धति पर सेवा दे रहे 212 कामगारों के स्थायीकरण के मामले ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। इन कामगारों के लिए नियमित पदों के सृजन को तत्काल शासन की मंजूरी देने की मांग शिवसेना महानगर प्रमुख तथा नगरसेवक प्रविण (बंटी) तिदमे ने उपमुख्यमंत्री तथा नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे से की है।

वर्ष 1994 से नगर निगम के मलेरिया विभाग में कार्यरत इन 212 कर्मचारियों ने तीन दशक का समय कंत्राटी सेवा में बिताया है। वर्षों से नगर निगम की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उनकी नौकरी को अब तक स्थायी स्वरूप नहीं मिला है।

इन कामगारों के नियमित पदों के सृजन का मामला न्यायालय तक पहुंच चुका है। निवेदन में मुंबई उच्च न्यायालय के रिट पिटिशन क्रमांक 11882/2018 तथा अन्य याचिकाओं में 12 फरवरी 2025 को दिए गए आदेश का उल्लेख किया गया है। इसके बाद नगर निगम ने संबंधित 212 कामगारों की सूची नगरविकास विभाग को भेज दी है।

नगर निगम की ओर से सूची शासन को भेजे जाने के बाद भी अंतिम मंजूरी का इंतजार बना हुआ है। इसी को लेकर प्रविण (बंटी) तिदमे ने पदों के सृजन को तत्काल मंजूरी देकर इन कामगारों को न्याय देने की मांग की है। उन्होंने शासन के समक्ष यह मुद्दा भी रखा कि तीन दशक तक सेवा लेने के बावजूद कामगारों को स्थायी नौकरी से वंचित रखना अन्याय है।

यदि शासन की ओर से पद सृजन को मंजूरी मिलती है, तो इन 212 कामगारों के नगर निगम की सेवा में स्थायी होने का रास्ता खुल सकता है।

इस मामले में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने निवेदन का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, ऐसा प्रविण (बंटी) तिदमे ने बताया है। अब नगरविकास विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है, इस पर 212 कामगारों और उनके परिवारों की नजर है।

तीन दशक की सेवा, न्यायालय का आदेश और नगर निगम की ओर से शासन को भेजी गई सूची के बावजूद स्थायी नौकरी के लिए प्रतीक्षा जारी है। अब सवाल यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के बाद पद सृजन को शासन की मंजूरी कब मिलती है। सकारात्मक निर्णय होने पर तीन दशक से कंत्राटी पद्धति पर कार्यरत 212 कर्मचारियों को सेवा में स्थायित्व मिल सकता है।

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