तस्वीर में मुंबई के लालबागचा राजा गणेशोत्सव पंडाल में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा नजर आ रही है।

मुंबई में लालबागचा राजा के दरबार में आने वाले भक्तों के प्रसाद और भोजन से निकलने वाला गीला कचरा अब बिजली बनाने में इस्तेमाल होगा। मुंबई बीएमसी ने पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के लिए ‘प्रसाद से ऊर्जा’ पहल शुरू की है। लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल के सहयोग से शुरू की गई इस योजना के तहत गणेशोत्सव के दौरान प्रसाद और भोजन कक्ष से निकलने वाले गीले कचरे का उपयोग कर बिजली तैयार की जाएगी।

गणेशोत्सव के 11 दिनों के दौरान लालबाग के पंडाल से प्रतिदिन लगभग 8 से 10 टन गीला कचरा और बचा हुआ खाना निकलने का अनुमान है। इस कचरे को अलग करने के बाद बीएमसी की विशेष गाड़ियों के माध्यम से नायर, कस्तुरबा, जीटीबी और सायन अस्पतालों में स्थापित बायोमिथेनेशन प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।

बीएमसी की योजना 11 दिनों में लगभग 80 टन गीले कचरे को प्रोसेस करने की है। इससे करीब 7,744 यूनिट पर्यावरण-अनुकूल बिजली बनाने का लक्ष्य है। इस प्रक्रिया से तैयार बिजली का इस्तेमाल बीएमसी अस्पतालों के मरीज कक्षों, गलियारों और परिसर में लगी लाइटों को जलाने के लिए किया जाएगा।

इस पहल से अस्पतालों के बिजली बिल में बचत होने के साथ शहर के कचरा प्रबंधन को भी मदद मिलने की बात कही गई है। लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल के सहयोग से शुरू की गई ‘प्रसाद से ऊर्जा’ योजना बड़े त्योहारों के दौरान निकलने वाले गीले कचरे को उपयोगी ऊर्जा में बदलने की दिशा में बीएमसी की पहल है। प्रसाद और भोजन से निकलने वाले कचरे से तैयार बिजली का उपयोग अब अस्पतालों में रोशनी के लिए किया जाएगा।

Tags: