ठाणे में अणुव्रत समिति ने मनाया अनुशासन दिवस, विद्यार्थियों को दिया नशा मुक्ति का संदेश
क्रिएटिव एकेडमी में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को अनुशासन अपनाने तथा मोबाइल की लत व नशे से दूर रहकर संस्कारी समाज बनाने का संकल्प दिलाया गया।
तस्वीर में ठाणे की अकादमी में अणुव्रत समिति के सदस्य विद्यार्थियों को संबोधित करते दिख रहे हैं।
मुंबई। अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्वावधान में एवं अणुव्रत समिति, मुंबई-क्षेत्र ठाणे के द्वारा अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत अनुशासन दिवस मनाया गया। कार्यक्रम क्रिएटिव एकेडमी, ठाणे (पश्चिम) में आयोजित हुआ, जहां विद्यार्थियों को अनुशासन के साथ नशे और बुरी आदतों से दूर रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति क्षेत्र ठाणे के संयोजक भंवरदास वैष्णव जैन ने अणुव्रत टीम के साथ अणुव्रत गीत के संगान से किया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए ‘अनुशासित बनें, नशा मुक्त भारत बनाएं’ का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता एवं उपाध्यक्ष अशोक इटोदिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन सबसे जरूरी है। समय पर उठना, समय पर पढ़ना और बड़ों का आदर करना ही अनुशासन है। उन्होंने कहा कि अनुशासित व्यक्ति ही नशा, मोबाइल की लत और बुरी आदतों से बच सकता है। नशा इंसान के शरीर, मन और परिवार-तीनों को तोड़ देता है। इसलिए अणुव्रत आंदोलन कहता है- "नशा छोड़ो, अनुशासन जोड़ो।"
सह-संयोजक सुभाष हिंगड़ ने बच्चों को "नशा छोड़ो, अनुशासन जोड़ो, जीवन को नया मोड़ दो" का संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन जॉन प्रभारी विमला हिरण ने किया। उन्होंने कहा कि नशा जीवन बर्बाद करता है और अनुशासन जीवन को मंजिल की ओर ले जाता है।
अणुव्रत कार्यकर्ता प्रिया मुथा ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी को संकल्प दिलाया कि हम सब मिलकर नशा मुक्त, संस्कारी और अनुशासित समाज बनाएंगे। श्याम दास ने सभी को अनुशासन दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर सागर सर, सानवी टीचर सहित क्रिएटिव एकेडमी के सभी बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम को उपाध्यक्ष अशोक इटोदिया, संयोजक भंवरदास वैष्णव जैन, सह-संयोजक सुभाष हिंगड़, जॉन प्रभारी विमला हिरण, प्रिया मुथा, श्याम दास तथा अणुव्रत कार्यकर्ताओं के विशेष सहयोग से सफल बनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच अनुशासन और नशा मुक्ति को लेकर जागरूकता के साथ नशा मुक्त, संस्कारी और अनुशासित समाज बनाने का संकल्प दोहराया गया।