नितेश राणे का ठाकरे बंधुओं पर हमला, बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को बचाने का लगाया आरोप
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने ठाकरे बंधुओं पर बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को बचाने के लिए आंदोलन करने का आरोप लगाया। एसआईआर, एमपीएससी छात्रों, महेश सावंत के इस्तीफे और हिंदू त्योहारों पर प्रदर्शनों को लेकर भी सवाल उठाए।
मुंबई। महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान, एमपीएससी के छात्रों के मुद्दे और हिंदू त्योहारों के दौरान होने वाले आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और मंत्री नितेश राणे ने ठाकरे बंधुओं पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को बचाना है।
नितेश राणे ने कहा कि एमपीएससी के छात्रों के मुद्दों से लेकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान तक, हर मामले में राजनीति की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे गुट के नेता बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं, ताकि अपनी राजनीतिक जमीन बचा सकें।
राणे ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रशंसा करते हुए कहा कि छात्रों के हितों को समझकर उन्हें न्याय दिलाने का काम केवल फडणवीस ही कर सकते हैं। उनके मुताबिक, इस मामले में एक बार फिर यह साबित हुआ है कि फडणवीस छात्रों के मुद्दों को समझते हैं और उनके हितों के लिए काम कर सकते हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर पर सवाल उठाने वाले नेताओं को भी राणे ने घेरा। उन्होंने पूछा कि लोकसभा चुनाव के दौरान यही प्रक्रिया सभी को सही लग रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार मिलने के बाद अचानक इसे गलत क्यों बताया जाने लगा। उन्होंने इस मुद्दे पर महेश सावंत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे इस्तीफा दें।
हिंदू त्योहारों के दौरान होने वाले आंदोलनों पर आपत्ति जताते हुए राणे ने गणेशोत्सव और नवरात्रोत्सव का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़े हिंदू पर्वों के समय ही आंदोलन करके शहर का माहौल क्यों बिगाड़ा जाता है। उन्होंने यह भी पूछा कि ईद और मुहर्रम जैसे त्योहारों के दौरान ऐसी हिंसक या आक्रामक नीतियां क्यों नहीं अपनाई जातीं।
राणे ने कहा कि मुंबई को जबरदस्ती बंद कराने और अराजकता फैलाने के दिन अब पूरी तरह लद चुके हैं। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए ठाकरे बंधुओं को चुनौती दी कि यदि उनमें वास्तव में हिम्मत है तो उन्हें पड़ोसी देश में प्रताड़ित किए जा रहे हिंदुओं के समर्थन में सड़कों पर उतरना चाहिए। राणे ने कहा कि ऐसा करने पर ही उन्हें असली 'ठाकरे' कहा जाता।
नितेश राणे के इन बयानों से महाराष्ट्र में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का एक और मुद्दा सामने आया है। एसआईआर अभियान, छात्रों के सवालों और त्योहारों के दौरान होने वाले प्रदर्शनों को लेकर जारी आरोप-प्रत्यारोप ने राज्य की राजनीति में बहस तेज कर दी है।