मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के कानून विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर बीएमसी में नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग पर अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक उत्पीड़न के साथ लापरवाही के कारण महानगरपालिका को 65 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। बीएमसी स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

कानून विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए विभाग प्रमुख पर तानाशाही और मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि अधिकारियों से चर्चा किए बिना अचानक उनका तबादला कर दिया जाता है। इससे अदालती काम प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ डालने और भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाकर परेशान करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग प्रमुख के इस रवैये के कारण कार्यालय का माहौल खराब हो चुका है। उनका कहना है कि विभाग में लिए जा रहे इस तरह के फैसलों का असर अधिकारियों के कामकाज के साथ अदालती मामलों की पैरवी पर भी पड़ रहा है।

वहीं, कानून विभाग की कथित लापरवाही का सबसे बड़ा आर्थिक असर बीएमसी को एक कानूनी मामले में उठाना पड़ा है। एक सलाहकार कंपनी ने 13 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान में हुई देरी को लेकर अदालत में मुकदमा दायर किया था। कानून विभाग की लचर पैरवी के कारण अदालत ने बीएमसी को संबंधित कंपनी को ब्याज समेत 65 करोड़ रुपये चुकाने का सख्त आदेश दिया है।

अदालत ने बीएमसी की संपत्तियों और बैंक खातों को जब्त करने की चेतावनी भी दी थी और भुगतान के लिए 24 सितंबर तक का समय दिया था। इस मामले ने कानून विभाग की कार्यप्रणाली और अदालती मामलों में उसकी पैरवी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूरे मामले की तुरंत निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग उठ रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायतों के साथ 65 करोड़ रुपये के भुगतान आदेश से जुड़े मामले की जांच अब बीएमसी के कानून विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के केंद्र में है।

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