किसानों को तत्काल आर्थिक मदद और सरसों पीकविमा दें, विदर्भ राज्य बनाने की मांग
समुद्रपुर में किसान संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन भेजकर किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता, सरसकट पीकविमा और स्वतंत्र विदर्भ राज्य की मांग की।
तस्वीर में समुद्रपुर में तहसीलदार कार्यालय के बाहर किसान संगठन और विदर्भ राज्य आघाड़ी के पदाधिकारी हाथ में ज्ञापन लिए हुए नजर आ रहे हैं।
समुद्रपुर। तालुका में उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता और सरसों पीकविमा देने के साथ स्वतंत्र विदर्भ राज्य के गठन की मांग की गई है। किसान संगठन और विदर्भ राज्य आघाड़ी की ओर से तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन सौंपकर किसानों की समस्याओं के तत्काल समाधान और स्वतंत्र विदर्भ राज्य के गठन की मांग रखी गई।
ज्ञापन में कहा गया कि ऐतिहासिक ‘नागपुर करार’ 28 सितंबर 1953 की शर्तों की पूर्ति नहीं हुई है। ऐसे में विदर्भ को तत्काल स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए। किसान संगठन की ओर से किसानों से जुड़ी विभिन्न मांगों को भी ज्ञापन में प्रमुखता से रखा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर कर्जमाफी योजना का क्रियान्वयन बेहद धीमी गति से चल रहा है। धीमी प्रक्रिया के कारण तकनीकी त्रुटियां बताकर कई जरूरतमंद किसानों को अपात्र ठहराया जा रहा है। अब तक अनेक पात्र किसानों के नाम सूची में नहीं आने से कर्ज के बोझ तले दबे किसान परेशानी और चिंता में हैं।
किसान संगठन ने चालू मौसम में वर्षा की स्थिति को देखते हुए पूरे तालुका में बिना किसी जटिल नियमावली के तत्काल सरसकट पीकविमा मंजूर करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि चालू मौसम में वर्षा काफी कम हुई है। बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है और उत्पादन में भारी कमी, बल्कि पूरी तरह उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति स्पष्ट है। इसलिए पूरे तालुका में तत्काल सरसकट पीकविमा लागू किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में भीषण सूखे की स्थिति को लेकर भी मांग रखी गई। किसान संगठन ने कहा कि केवल कागजों पर सूखा घोषित करने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा। जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद गंभीर है। इसलिए सरकार को कोरड़ा दुष्काल घोषित कर संकट में फंसे प्रत्येक किसान के बैंक खाते में कम से कम 1,00,000 रुपये की तत्काल और पर्याप्त आर्थिक सहायता जमा करनी चाहिए।
विदर्भ राज्य आघाड़ी की ओर से कहा गया कि विदर्भ का सर्वांगीण विकास और यहां के किसानों की आर्थिक स्थिरता केवल स्वतंत्र राज्य के गठन से संभव है। संगठन ने नागपुर करार की शर्तों का पालन नहीं होने का हवाला देते हुए विदर्भ को तत्काल स्वतंत्र राज्य का दर्जा देने की मांग की। इसके साथ ही विदर्भ के किसानों को कृषि उपज का उचित मूल्य दिलाने और सिंचाई की लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की गई।
ज्ञापन में विदर्भ के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। किसान संगठन और विदर्भ राज्य आघाड़ी ने तहसीलदार से यह निवेदन केंद्र सरकार और राज्य सरकार तक तत्काल पहुंचाने तथा विदर्भ की जनता की भावनाओं और मांगों का संज्ञान लेने की मांग की।
ज्ञापन सौंपते समय किसान संगठन के जिलाध्यक्ष उल्हास कोटमकर, किसान संगठन पूर्व विदर्भ प्रमुख डॉ. हेमंत ईसनकर, सुनील हिवसे, शांतिलाल गांधी, संदीप भोले, भाऊराव देवड़े, संजय पाटील, राजू शेंडे, पांडुरंग किते, गौरव ठोंबरे, दत्तु मुळे, दिनेश महाकाळकर आदि सहित किसान संगठन और विदर्भ राज्य आघाड़ी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।