गिरड-खुर्सापार जंगल सफारी में पहुंचे सयाजी शिंदे, तीन घंटे लिया प्रकृति का आनंद
सयाजी शिंदे ने गिरड-खुर्सापार जंगल सफारी में करीब तीन घंटे बिताए। वनसंपदा, जैवविविधता और वन्यजीव अधिवास की जानकारी लेने के बाद उन्होंने यहां की प्राकृतिक विविधता की सराहना की और सफारी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
तस्वीर में अभिनेता सयाजी शिंदे (तीसरे व्यक्ति बाएं से) और वन विभाग के अधिकारी गिरड-खुर्सापार जंगल सफारी परिसर में चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं.
समुद्रपुर तालुका में नव्याने विकसित हो रहे गिरड-खुर्सापार जंगल सफारी प्रकल्प को ज्येष्ठ मराठी अभिनेता और पर्यावरणप्रेमी सयाजी शिंदे ने हाल ही में भेंट दी। पेंच व्याघ्र प्रकल्प के वनपरिक्षेत्र अधिकारी निलेश गावंडे के आग्रह पर पहुंचे सयाजी शिंदे ने करीब तीन घंटे जंगल सफारी की और क्षेत्र की वनसंपदा, जैवविविधता, वन्यजीवों के अधिवास तथा भौगोलिक विशेषताओं की जानकारी ली। प्रकृति के सान्निध्य में सफारी का आनंद लेते हुए उन्होंने समाधान व्यक्त किया।
सफारी के दौरान गिरड क्षेत्र के जंगल, खेती व्यवस्था, प्राकृतिक संसाधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। जंगल के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए सयाजी शिंदे ने यहां के प्राकृतिक वातावरण का अनुभव लिया।
सफारी के बाद वन विभाग के विश्रामगृह में वनपरिक्षेत्र अधिकारी स्वप्नील ढोणे, थानेदार विकास गायकवाड और वन विभाग के कर्मचारियों ने सयाजी शिंदे का स्वागत किया। समुद्रपुर तालुका में उनके प्रथम आगमन के अवसर पर मोहगाव ग्रामपंचायत के पूर्व सरपंच विलास नवघरे, पत्रकार गजानन गारघाटे, राकेश बोबडे, राहुल गाठे और प्रशांत ठाकूर ने शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ तथा छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति भेंट कर उनका सत्कार किया। इस दौरान पेंच व्याघ्र प्रकल्प के वनपरिक्षेत्र अधिकारी निलेश गावंडे उपस्थित रहे।
सयाजी शिंदे ने गिरड-खुर्सापार के जंगल को लेकर कहा, ‘‘कई व्याघ्र सफारियों का दौरा किया है, लेकिन गिरड-खुर्सापार जैसी प्राकृतिक विविधता कहीं भी देखने को नहीं मिली। जंगल के तालाब, नाले और घास के मैदान मन को भा गए। यह प्रकल्प पहले ही शुरू हो जाना चाहिए था। सफारी शुरू होने के बाद यहां दोबारा जरूर आऊंगा। गिरड सफारी जल्द ही महाराष्ट्र में बड़ा नाम करेगी।’’
गिरड जंगल सफारी प्रकल्प से गिरड क्षेत्र के जंगल, जैवविविधता और प्राकृतिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की संभावना जताई जा रही है। सयाजी शिंदे की इस यात्रा से नव्याने विकसित हो रही जंगल सफारी की ओर ध्यान गया है। प्रकल्प के निर्माण में विधायक समीर कुणावार, उपवनसंरक्षक हरविर सिंग, सहायक वनसंरक्षक हरीष सरोदे और तत्कालीन वनपरिक्षेत्र अधिकारी निलेश गावंडे का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।