तस्वीर में प्राचार्य शिवाजी होडगे लेखक संदीप मुसळे को सम्मानित कर रहे हैं।

ग्रामीण जीवन, वहां के लोगों के अनुभव और उनके भीतर छिपे दर्द ने लेखक एवं चित्रकार संदीप मुसळे के लेखन को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि गांव ही उनके लेखन की वास्तविक प्रेरणा है और ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न स्वभाव वाले लोगों का जीवन तथा उनके अनुभवों में छिपी पीड़ा उनके लेखन का माध्यम है। वे सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में मराठी विभाग की ओर से आयोजित ‘लेखक संवाद’ कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

साहित्य सृजन की प्रक्रिया पर बात करते हुए संदीप मुसळे ने बताया कि ग्रामीण जीवन से मिले अनुभव किस तरह उनके लेखन को आकार देते हैं। उन्होंने ‘भोरकडी’ कहानी संग्रह की विभिन्न कहानियों के बीज उनके मन में किस तरह अंकुरित हुए और उनके पीछे कौन से अनुभव रहे, इसकी जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने कहा, “मनुष्य का जीवन बेचैन करने वाला है। मनुष्य के अंतर्मन में छिपी पीड़ा हमें लिखने के लिए प्रेरित करती है।”

इस अवसर पर संदीप मुसळे ने अपना ‘भोरकडी’ कहानी संग्रह महाविद्यालय को भेंट किया। महाविद्यालय की ओर से उनका विशेष सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. शिवाजी होडगे ने कहा कि लेखक अपने मन में तथा आसपास घटने वाली घटनाओं और प्रसंगों को रचनात्मकता के साथ शब्दों में ढालकर पाठकों तक पहुंचाता है। अनुभवों की छाप जब शब्दों को मिलती है, तब लेखक पाठकों के सामने एक नई दुनिया खड़ी करता है। यही उसकी लेखनी की श्रेष्ठता है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी संदीप मुसळे गंभीर और संवेदनशील लेखन कर रहे हैं, इसका हमें गर्व है। उन्होंने संदीप मुसळे को आगे भी निरंतर लेखन करते हुए पाठकों के सामने नया साहित्यिक संसार प्रस्तुत करने की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम की प्रस्तावना मराठी विभागाध्यक्ष डॉ. सुखदेव एकल ने की। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के पीछे की भूमिका स्पष्ट की।

इस अवसर पर नैक समन्वयक प्रो. माणिक पाटील, स्टाफ सचिव प्रो. दादासाहेब सरदेसाई, प्रो. दीपक साळुंखे, प्रो. संजय हेरवाडे, प्रो. अशोक पाटील, प्रो. सुशांत पाटील, प्रो. राम पाटील, प्रो. स्वप्निल मेंडके, प्रो. नितेश रायकर, प्रो. धनाजी खतकर, प्रो. दिपाली सामंत, प्रो. मनीषा पाटील सहित महाविद्यालय के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ग्रामीण जीवन के अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया पर संदीप मुसळे का संवाद विद्यार्थियों के लिए प्रमुख आकर्षण रहा।

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