महाराष्ट्र शासन के स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र निजी कोचिंग केंद्र (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2026’ के प्रारूप मसौदे पर राज्यभर से बड़ी संख्या में आपत्तियां और सुझाव प्राप्त होने के बाद शासन ने आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ा दी है। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 7 सितंबर 2026 को सार्वजनिक सूचना जारी कर आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि अब 15 सितंबर 2026 शाम 6 बजे तक कर दी है।

शासन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 7 सितंबर तक राज्यभर से 11 हजार 410 लिखित सुझाव और आपत्तियां शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई हैं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेश पालकर के हस्ताक्षर से यह सार्वजनिक सूचना जारी की गई है। प्रारंभ में 4 सितंबर तक आपत्तियां मांगी गई थीं। हालांकि, शिक्षकों, निजी कोचिंग संचालकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों से बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं प्राप्त होने के बाद शासन ने अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया।

बढ़ी हुई अवधि में नागरिकों से अपनी निवेदन और आपत्तियां doesecondary1@gmail.com के आधिकारिक ई-मेल पर भेजने का आह्वान शिक्षा विभाग ने किया है।

कानून का विरोध नहीं, कठोर शर्तों पर आपत्ति

निजी कोचिंग क्लास संरक्षण महा-अभियान के डॉ. प्रफुल्ल पाटील ने शासन द्वारा अवधि बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “निजी शिक्षा व्यवस्था में सुव्यवस्था लाने के लिए नियमन आवश्यक है। हमारा पूरे कानून या शासन की भूमिका का विरोध नहीं है। हालांकि, मसौदे की कुछ धाराएं कठोर और अव्यावहारिक हैं तथा उनका पुनर्विचार आवश्यक है।”

उन्होंने मामूली त्रुटियों के लिए 10 से 50 लाख रुपये तक के जुर्माने, छोटे शिक्षकों और कोचिंग संचालकों के लिए 25 विद्यार्थियों की सीमा, किराए की जगहों में प्रति विद्यार्थी एक वर्ग मीटर स्थान और स्वतंत्र पार्किंग की शर्त तथा 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कोचिंग पर प्रस्तावित प्रतिबंधों पर आपत्ति दर्ज की। ग्रामीण और मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए इन शर्तों में ढील देकर सरल नीति तैयार करने की मांग उन्होंने की।

कोल्हापुर डिस्ट्रिक्ट प्रोफेशनल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक खोत ने कहा, “शासन द्वारा दी गई अवधि बढ़ाना निजी शिक्षकों, कोचिंग संचालकों और अभिभावकों की एकजुटता का सकारात्मक परिणाम है। आधिकारिक रूप से 11 हजार से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई हैं। इस मुद्दे पर कोल्हापुर से संघर्ष को और व्यापक किया जाएगा।”

अवधि बढ़ने से तकनीकी कारणों या कम समय के कारण आपत्ति दर्ज नहीं करा सके कोचिंग संचालकों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को अब एक और अवसर मिला है। इसलिए संबंधित संगठनों ने बढ़ी हुई अवधि में अधिक से अधिक आपत्तियां और सुझाव शासन के समक्ष प्रस्तुत करने का आह्वान किया है।

अब शासन को प्राप्त 11 हजार 410 से अधिक आपत्तियों की समीक्षा के बाद मसौदे में कौन-कौन से बदलाव किए जाते हैं, इस पर राज्य के निजी कोचिंग क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

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