महाराष्ट्र के वर्धा जिले के समुद्रपुर में प्रभाताई राव विचार मंच के जिलाध्यक्ष प्रवीण उपासे के नेतृत्व में जाम चौराहे पर रास्ता रोको आंदोलन करते किसान और प्रदर्शनकारी।   

महाराष्ट्र के समुद्रपुर में इस वर्ष अपर्याप्त बारिश से प्रभावित किसानों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और कर्ज की अनिवार्य वसूली बंद करने की मांग को लेकर प्रभाताई राव विचार मंच ने जाम चौराहे पर रास्ता रोको आंदोलन किया। मंच की नेता चारूताई राव के निर्देश पर जिलाध्यक्ष प्रवीण उपासे के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में किसानों ने शामिल होकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध जताया। आंदोलन के दौरान चौराहे की चारों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 37 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद लगभग एक घंटे में राजमार्ग पर यातायात बहाल किया गया।

आंदोलन के दौरान प्रभाताई राव विचार मंच के जिलाध्यक्ष प्रवीण उपासे ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अपर्याप्त बारिश के कारण किसान चिंता में हैं। उन्होंने कहा कि वर्धा जिले का सफेद सोना सरकार की उदासीन नीतियों के कारण प्रभावित हुआ है। इस वर्ष कम बारिश, खाद की बढ़ती कीमतों और महंगे बीजों के बावजूद बारिश के अभाव में बीजों के अंकुरण की क्षमता कम रही, जिससे सभी कृषि उपज का उत्पादन घट गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी के कारण इस बार रबी की फसल होने की संभावना नहीं है।

प्रवीण उपासे ने कहा कि सरकार ने बोरिंग और कुएं खोदने पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने इस फैसले को किसानों के साथ अन्याय बताते हुए मांग की कि किसानों को अपने खेतों में कुएं या बोरिंग खोदने की अनुमति दी जाए।

आंदोलन में प्रवीण उपासे, डॉ. रामकृष्ण खुजे, गुणवंत कोठेकार, रामाजी वाघ, प्रशांत गहुकार और विजय तडस ने भी किसानों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कपास के लिए 15,000 रुपये प्रति क्विंटल और विदर्भ की नकदी फसल के रूप में पहचाने जाने वाले सोयाबीन के लिए 10,000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव निर्धारित करने की मांग की।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में सूखाग्रस्त किसानों को तत्काल एक लाख रुपये की सहायता देना, कपास का भाव 15,000 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन का भाव 10,000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करना शामिल है। इसके अलावा, कर्जमाफी की राशि तत्काल बैंक खातों में जमा करने और किसानों को अगले कृषि सत्र के लिए बैंकों के माध्यम से कर्ज उपलब्ध कराने की मांग की गई।

मंच ने फसल बीमा योजना तत्काल लागू करने, खेतों में सौर ऊर्जा योजना रद्द कर पहले की तरह बिजली उपलब्ध कराने और निजी साहूकारों तथा वित्त कंपनियों की ओर से की जाने वाली कर्ज वसूली पर रोक लगाने की भी मांग रखी। इसके साथ ही रासायनिक खाद की कीमतें रद्द करने और खाद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण बंद करने की मांग की गई।

आंदोलन को सफल बनाने में मनीष साहू, निखिल श्रीवास, प्रवीण पणत, गजानन बोरेकर, सुरेश अराडे, अमित मांडवकर, महेश नागापुरे, पुरुषोत्तम भगत, प्रशांत वढूले, वामन बावणे, प्रशांत फोफारे, दिलीप डंभारे, मिलिंद डफ, कमलाकर देशमुख, बालू ठाकरे, पप्पू साठोणे, विशाल काळे, नूतन राठोड, नाना मानकर, तानबाजी वैद्य, शाम उईके, अवी बंगाले, बंटी शेंडे, विनोद डंभारे और प्रीतम शिंदे ने परिश्रम किए। जाम चौराहे पर हुए इस आंदोलन के जरिए मंच ने सूखे से प्रभावित किसानों की आर्थिक सहायता, कृषि उपज के उचित मूल्य और कर्ज वसूली से राहत सहित विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखा।

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