निमझरी आश्रम शाला में गूंजे ‘जय आदिवासी, जय जोहार’, निबंध स्पर्धा के साथ मनाया क्रांति दिन
निमझरी की आर.सी. पटेल आश्रम शाला में 9 अगस्त को जागतिक आदिवासी दिन और क्रांति दिन उत्साह से मनाया गया। बिरसा मुंडा सहित आदिवासी महापुरुषों का अभिवादन, निबंध स्पर्धा और जय जोहार के नारों ने कार्यक्रम को विशेष बनाया।
तस्वीर में निमझरी स्थित आर.सी. पटेल आश्रम शाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वक्ता माइक पर भाषण देते हुए और सामने जमीन पर बैठे स्कूली विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।
निमझरी, दि. 9 अगस्त 2026 : आर.सी. पटेल अनुदानित प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक आश्रम शाला, निमझरी में जागतिक आदिवासी दिन तथा क्रांति दिन उत्साहपूर्वक और विभिन्न उपक्रमों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी क्रांतिकारकों के योगदान पर विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आदिवासी समाज के दैवत धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, भगवान वीर एकलव्य, क्रांतिवीर खाज्या नाईक, तंट्या भिल तथा अन्य महान आदिवासी महापुरुषों की प्रतिमाओं पर पुष्पहार अर्पित कर पूजन एवं अभिवादन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राथमिक विभाग के मुख्याध्यापक जी. एम. पाटील ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में माध्यमिक विभाग के प्राचार्य पी. पी. चव्हाण उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक ए.पी. माळी सर और जी.डी. लांबर्डे सर ने विद्यार्थियों को जागतिक आदिवासी दिन के महत्व, आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और संघर्ष के साथ ही देश के स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी क्रांतिकारकों के योगदान की जानकारी दी।
जागतिक आदिवासी दिन और क्रांति दिन के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए दो समूहों में निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में उत्स्फूर्त सहभागिता दर्ज कराया। अपने लेखन के माध्यम से विद्यार्थियों ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, जीवन पद्धति, स्वतंत्रता आंदोलन तथा आदिवासी महापुरुषों के कार्यों के प्रति अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सूत्र संचालन जगदीश धनगर सर और सौ. योगिता तायडे मैडम ने किया। समापन अवसर पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। इसके बाद ‘जय आदिवासी, जय जोहार’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के अधीक्षक व अधीक्षिका, सभी शिक्षक बंधु-भगिनी, शिक्षकेतर कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण सहयोग और उत्स्फूर्त उपस्थिति रही। आदिवासी संस्कृति, शौर्य और स्वाभिमान की भावना विद्यार्थियों के मन में स्थापित करने वाला यह कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में मिष्टान्न भोजन के साथ संपन्न हुआ।