तस्वीर में मुंबई स्थित म्हाडा का आधिकारिक नाम और लोगो वाला साइनबोर्ड दिख रहा है।

महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया है कि मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन (MFA) का बांद्रा रिक्लेमेशन स्थित नेविल डिसूजा फुटबॉल मैदान पर कोई स्थायी कानूनी या मालिकाना अधिकार नहीं है। MHADA ने कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में कहा कि MFA को 8,450 वर्ग मीटर की संपत्ति का इस्तेमाल केवल सीमित अवधि और निर्धारित शर्तों के तहत करने की अनुमति दी गई थी। Mumbai Live

MHADA के अनुसार MFA को मिली सबसे नई अनुमति 22 सितंबर 2019 से 21 सितंबर 2024 तक वैध थी। प्राधिकरण ने कहा कि एसोसिएशन केवल इस आधार पर संपत्ति के लगातार इस्तेमाल का दावा नहीं कर सकती कि उसे पहले कुछ समय के लिए वहां उपयोग की अनुमति दी गई थी। लैंड रिजर्वेशन में प्रस्तावित बदलाव को लेकर MFA की चुनौती को भी MHADA ने समय से पहले बताया। उसके मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने डेवलपमेंट प्लान (DP) में अभी कोई अंतिम बदलाव मंजूर नहीं किया है। Mumbai Live

MHADA ने कहा कि MFA की याचिका किसी अंतिम कानूनी फैसले के बजाय आंतरिक प्रशासनिक बातचीत और प्लानिंग प्रस्तावों पर शुरुआती विचार को चुनौती देती है। वहीं, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) भी पहले कोर्ट के सामने इसी तरह का रुख अपना चुका है। BMC ने कहा था कि संपत्ति का प्लेग्राउंड डेजिग्नेशन और रिजर्वेशन अभी अंतिम रूप से हटाया नहीं गया है। इसे कन्वेंशन या एग्जिबिशन सेंटर में बदलने के लिए भी कोई मंजूरी नहीं दी गई है। Mumbai Live

यह विवाद MHADA की संपत्ति के बदलते प्लानिंग स्टेटस से जुड़ा है। यह प्लॉट मूल रूप से 1983 में कन्वेंशन और ट्रेड फेयर सेंटर के लिए रिजर्व किया गया था। लगभग 15 साल पहले MFA को इसके इस्तेमाल की कुछ समय के लिए अनुमति दी गई थी। चूंकि उस स्थान पर पहले से फुटबॉल ग्राउंड संचालित था, इसलिए बाद में DP 2034 के तहत संपत्ति को रिक्रिएशन ग्राउंड के तौर पर मार्क किया गया। Mumbai Live

मामला तब फिर उठा जब MHADA ने नवंबर 2025 में BMC को पत्र लिखकर संपत्ति का मूल रिजर्वेशन बहाल करने की मांग की। मई में BMC की इम्प्रूवमेंट कमिटी ने बदले हुए DP 2034 के तहत रिजर्वेशन में बदलाव की सिफारिश की। इसके बाद MFA ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। Mumbai Live

10 अगस्त को सुनवाई के दौरान BMC ने अपना एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय मांगा और कोर्ट को मौखिक रूप से भरोसा दिलाया कि स्थिति को जैसा है वैसा ही रखा जाएगा। हालांकि, बाद में 18 अगस्त को BMC की जनरल बॉडी ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। MFA ने आरोप लगाया कि इस कदम से कोर्ट को दिए गए भरोसे का उल्लंघन हुआ और उसने तत्काल सुनवाई की मांग की। Mumbai Live

MHADA ने कहा कि नवंबर 2025 में BMC को भेजा गया उसका कम्युनिकेशन केवल एक अनुरोध था और इसे अंतिम कानूनी फैसला नहीं माना जा सकता। प्राधिकरण के अनुसार यदि रिजर्वेशन में बदलाव की कार्रवाई शुरू होती है तो महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट, 1966 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। Mumbai Live

MHADA ने यह भी कहा कि किसी रिजर्वेशन की “सही होने, जरूरत और प्लानिंग की जरूरत” से जुड़े सवालों का फैसला सक्षम प्लानिंग अथॉरिटी और राज्य सरकार को कानून के अनुसार करना होगा। हाउसिंग अथॉरिटी ने संपत्ति के 1983 के लेआउट और उससे जुड़े दस्तावेज BMC के सामने रखने का भी बचाव किया और कहा कि ये साइट के लिए आवश्यक प्लानिंग रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।