म्हाडा वरिष्ठता विवाद: नागपुर पीठ बोली- मेरिट क्रम से तय होगी seniority
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही भर्ती से जुड़े कर्मचारियों की वरिष्ठता जॉइनिंग की तारीख के बजाय चयन परीक्षा के मेरिट क्रम के आधार पर तय होगी।
तस्वीर में बंबई उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक इमारत और परिसर के हरे-भरे पेड़ दिख रहे हैं।
नागपुर। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने म्हाडा में दो सहाय्यक अभियंताओं की वरिष्ठता के विवाद पर महत्वपूर्ण निरीक्षण करते हुए स्पष्ट किया कि एक ही भर्ती प्रक्रिया में एक ही दिन नियुक्त किए गए सीधी सेवा कर्मचारियों की वरिष्ठता चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित मेरिट क्रम के आधार पर तय होगी। केवल पहले सेवा में शामिल होने के आधार पर किसी कर्मचारी को वरिष्ठ नहीं माना जा सकता।
यह मामला म्हाडा के अमरावती विभागीय कार्यालय में कार्यरत द्वितीय श्रेणी सहाय्यक अभियंता दिलीप कळसकर और अमोल बुधकोंडवार से जुड़ा था। दिलीप कळसकर ने बुधकोंडवार को उपअभियंता पद पर दी गई पदोन्नति को चुनौती देते हुए स्वयं को उनसे वरिष्ठ बताया था। दोनों की नियुक्ति 19 जुलाई 2008 को एक ही भर्ती प्रक्रिया में हुई थी।
कळसकर 21 जुलाई को सेवा में शामिल हुए थे, जबकि बुधकोंडवार ने 1 अगस्त को सेवा स्वीकार की थी। हालांकि चयन प्रक्रिया में बुधकोंडवार को 68.40 अंक मिले थे और वे मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर थे। वहीं कळसकर को 64.80 अंक मिले और उनका मेरिट क्रमांक दूसरा था।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल पानसरे और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता के समक्ष हुई। न्यायालय ने म्हाडा के 1987 के वरिष्ठता नियमों का संदर्भ देते हुए कहा कि एक ही दिन नियुक्त किए गए सीधी सेवा कर्मचारियों की वरिष्ठता चयन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मेरिट क्रम के अनुसार तय की जाती है। इसलिए सेवा में बाद में शामिल होने के बावजूद मेरिट सूची में आगे रहने वाले बुधकोंडवार को वरिष्ठ माना जाएगा।
मामले में बुधकोंडवार की नियुक्ति के समय निर्धारित अवधि में एमएस-सीआईटी की आवश्यक पात्रता पूरी नहीं हुई थी। उन्होंने 26 नवंबर 2012 को यह परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद सक्षम प्राधिकरण ने 1 नवंबर 2013 को आदेश जारी कर उनकी सेवा 26 नवंबर 2012 से नियमित कर दी। न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि इस नियमितीकरण को स्वतंत्र रूप से चुनौती देकर रद्द नहीं कराया गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल एमएस-सीआईटी परीक्षा देर से उत्तीर्ण करने के आधार पर बुधकोंडवार की वरिष्ठता समाप्त नहीं होती। इसी आधार पर कळसकर की वरिष्ठता संबंधी मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
न्यायालय ने यह भी कहा कि आवश्यक सेवाकाल पूरा कर लेने मात्र से कर्मचारी को पदोन्नति का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होता। नियमों के अनुसार पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार कर्मचारी को रहता है। कळसकर यह सिद्ध नहीं कर सके कि बुधकोंडवार की पदोन्नति नियमों के विरुद्ध या आरक्षण रोस्टर के विपरीत हुई थी।
इन आधारों पर न्यायालय ने कळसकर की याचिका खारिज कर दी। मामले में न्यायालय के निरीक्षण से स्पष्ट हुआ कि समान भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त सीधी सेवा कर्मचारियों की वरिष्ठता तय करने में केवल सेवा में शामिल होने की तारीख नहीं, बल्कि चयन के दौरान निर्धारित मेरिट क्रम महत्वपूर्ण आधार है।