लातूर के जिलाधिकारी कार्यालय में पूर्व मंत्री संभाजी पाटील निलंगेकर और जिलाधिकारी डॉ. भारत बाष्टेवाड सूखा राहत उपायों पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ज्ञापन सौंपते और चर्चा करते हुए।   

लातूर शहर सहित जिले में गंभीर सूखे की स्थिति के बीच किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों को राहत दिलाने के लिए पूर्व मंत्री एवं विधायक संभाजी पाटील निलंगेकर ने तत्काल और दीर्घकालीन उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल प्रबंधन, किसानों को आर्थिक सहायता, लंबित फसल बीमा राशि के वितरण, पशुओं के लिए चारे-पानी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा।

लातूर जिले में उत्पन्न गंभीर सूखे की स्थिति को लेकर पूर्व मंत्री एवं विधायक संभाजी पाटील निलंगेकर ने 13 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक की। जिलाधिकारी डॉ. भारत बाष्टेवाड सहित विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे। बैठक में सूखे से निपटने के लिए अल्पकालीन और दीर्घकालीन उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।

निलंगेकर ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक उपाय कर रही है। प्रशासन को भी तत्परता से काम करना चाहिए। जिले के प्रत्येक जनप्रतिनिधि को किसानों और नागरिकों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं समझनी चाहिए। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर तत्काल राहत के साथ दीर्घकालीन समाधान तैयार करने की आवश्यकता है।

जिले में लगातार बढ़ते जल संकट को देखते हुए उन्होंने पानी का उचित नियोजन, जल संरक्षण, खेतों में रोजगार उपलब्ध कराने तथा जल के प्राकृतिक और कृत्रिम स्रोतों को जीवित रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इन प्राथमिकताओं के आधार पर युद्धस्तर पर काम करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूरों की आजीविका बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है।

बैठक में किसानों की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई। निलंगेकर ने मांग की कि दशहरा और दिवाली के त्योहारों के दौरान किसानों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें तत्काल प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही, लंबित फसल बीमा राशि का शीघ्र वितरण किया जाए।

जिले में पानी की गंभीर कमी के कारण पशुधन को बचाना बड़ी चुनौती बन गया है। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में चारा शिविर या चारा बैंक शुरू करने तथा पशुओं को मुफ्त चारा और पानी उपलब्ध कराने की मांग की।

ग्रामीण मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए उन्होंने 'मांगने वाले को काम' की नीति के तहत रोजगार गारंटी योजना से जल संरक्षण, तालाबों के विस्तार और गाद निकालने के कार्य बड़े पैमाने पर शुरू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूखे से प्रभावित किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सूखाग्रस्त क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस माफ करने और विशेष आर्थिक प्रावधान करने की मांग भी रखी।

बैठक में ग्रामीण महिलाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों पर छोटे वित्तीय संस्थानों तथा अन्य ऋणों की अनिवार्य वसूली का मुद्दा भी उठाया गया। निलंगेकर ने कहा कि कर्ज की सख्त वसूली से महिलाएं और उनके परिवार मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अनिवार्य वसूली पर रोक लगाने और नीतिगत स्तर पर राहत देने की मांग की।

उन्होंने चीनी मिलों से गन्ने की कटाई में मशीनों के बजाय मजदूरों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। इससे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलेगा और पशुओं के चारे के लिए गन्ने की पत्तियां भी उपलब्ध हो सकेंगी।

पानी की बर्बादी रोकने और उपलब्ध जल का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के तहत स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई पर 100 प्रतिशत अनुदान देने का सुझाव दिया गया। इसके अलावा, जिले के बांधों से गाद निकालकर जल परियोजनाओं की भंडारण क्षमता बढ़ाने की मांग की गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार के अवसर तैयार करने के लिए निलंगेकर ने कृषि आधारित उद्योगों, पशुधन आधारित ग्रामीण उद्यमों और किसान उत्पादक कंपनियों को सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन देने तथा पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में संभाजी पाटील निलंगेकर ने कहा कि मौजूदा संकट के दौरान राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर किसानों और मजदूरों के साथ मजबूती से खड़ा होना सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इन मांगों का लगातार अनुसरण किया जाएगा और संकट के समय किसानों को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन की ओर से भी सभी मांगों पर सकारात्मक विचार कर आवश्यक कार्रवाई शीघ्र करने का आश्वासन दिया गया।

बैठक में संजय दोरवे, दगडू साळुंके, मंगेश पाटील, निलंगा नगराध्यक्ष संजय हलगरकर, पूर्व नगराध्यक्ष बाळासाहेब शिंगाडे, शिरुर अनंतपाळ पंचायत समिति के सभापति संजय सुर्यवंशी, देवणी पंचायत समिति की सभापति अंकिता पाटील, निलंगा पंचायत समिति की सभापति सुनिता वाघमारे, शिरुर अनंतपाळ तालुकाध्यक्ष माधव बिरादार, देवणी तालुकाध्यक्ष शिवराज बिरादार, देवणी कृषि उपज मंडी समिति के सभापति सदाशिव पाटील, शिरुर अनंतपाळ कृषि उपज मंडी समिति के प्रभारी सभापति गोविद चिलकुरे, प्रशांत पाटील जवळगेकर, जिला परिषद सदस्य रामलिंग शेरे, नगरसेवक संतोष शेटे और गणेश धुमाळे सहित अन्य पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

लातूर शहर के लिए विशेष जल प्रबंधन की मांग

निलंगेकर ने कहा कि सूखे के कारण पैदा हुई जल किल्लत का सबसे अधिक असर लातूर शहर पर पड़ सकता है। शहर की जलापूर्ति के लिए विशेष उपाय करना आवश्यक है। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाले मांजरा बांध में बहुत कम जल भंडार शेष है। ऐसे में उपलब्ध पानी का सावधानीपूर्वक नियोजन करने के साथ पानी की चोरी और रिसाव रोकने के लिए नगर निगम प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ हद तक पानी उपलब्ध होने की संभावना है, लेकिन लातूर शहर में पानी के अन्य स्रोत नहीं होने के कारण नगर निगम को विशेष व्यवस्था करनी होगी। शहर की जलापूर्ति बनाए रखने के लिए उपलब्ध जल का उचित उपयोग और उसकी बर्बादी रोकना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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