चेम्बूर में आयोजित नवान्हिक अनुष्ठान में साध्वी निर्वाणश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

चेम्बूर में नवरात्रि के तीसरे दिन आयोजित जपानुष्ठान में तनाव प्रबंधन और जीवन की बाधाओं के प्रशमन के उपायों पर प्रभावक चर्चा की गई। आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में चल रहे नवान्हिक अनुष्ठान में मंत्र-जप की विधियों, श्रद्धा और नियमित साधना के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

नवान्हिक अनुष्ठान प्रातः 8.55 से 10.25 तक तथा रात्रि 8.15 बजे से अत्यंत प्रभावी ढंग से चल रहा है। उपस्थित संभागियों को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि मंत्रों के प्रयोग की अनेक विधियां हैं। मंत्र का फल प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक निर्धारित समय तक उसका जप करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विघ्नों के प्रशमन के लिए कई प्रभावशाली मंत्र हैं। इनमें ‘ॐ ह्रीं अनंतवीर्याय नमः’ मंत्र का प्रतिदिन जप विघ्न शांति का अचूक उपाय है।


साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने संप्रेरक वक्तव्य में कहा कि जहां जीवन है, वहां बाधाओं, विघ्नों और तनाव का न होना संभव नहीं है। इन बाधाओं के निवारण के लिए सकारात्मक सोच, निरंतर प्रयोग और जप के माध्यम से अनुकूल परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मंत्र-विज्ञान में ऐसे सैकड़ों प्रयोग मिलते हैं, जो आश्चर्यजनक प्रभाव दिखाते हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ भक्तामर के सस्वर पाठ से हुआ। आचार्य महाश्रमण की स्तुति के पश्चात अनुष्ठान में सैकड़ों स्वर मुखर हुए। इस दौरान महिला वर्ग ने लाल परिधान में और श्रावकों ने श्वेत परिधान में मंत्र-जप के प्रयोग किए।

चेम्बूर में आयोजित इस नवरात्रि जपानुष्ठान में मंत्र-साधना के माध्यम से तनाव प्रबंधन और विघ्नों के प्रशमन के उपायों पर चर्चा के साथ श्रद्धा, नियमित जप और सकारात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया गया।

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