कोल्हापुर के सीपीआर अस्पताल में जटिल सर्जरी के सफल होने के बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ से मुलाकात करते डॉक्टर और मरीज।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं छत्रपति प्रमिलाराजे सर्वोपचार अस्पताल (सीपीआर) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के इतिहास में पहली बार खोपड़ी के आधार से संबंधित दो अत्यंत जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं। इस उपलब्धि से कोल्हापुर सहित पूरे पश्चिमी महाराष्ट्र के मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक न्यूरोसर्जिकल उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

दोनों सर्जरी के बाद मरीजों ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ से मुलाकात कर उपचार के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सीपीआर प्रशासन और इलाज करने वाले डॉक्टरों का भी धन्यवाद किया।

पहली सर्जरी में एंडोस्कोपिक एंडोनाजल ट्रांसस्फेनॉइडल तकनीक का इस्तेमाल कर नाक के रास्ते पिट्यूटरी ट्यूमर निकाला गया। इस आधुनिक पद्धति में पारंपरिक सर्जरी की तरह खोपड़ी खोलने (क्रेनियोटॉमी) की आवश्यकता नहीं होती। इससे सर्जरी के बाद मरीज को होने वाली परेशानी कम करने और जल्द स्वस्थ होने में मदद मिलती है।

दूसरे जटिल मामले में एथमॉइड साइनस से मस्तिष्क और खोपड़ी के आधार की ओर फैले फंगल बॉल को अत्यंत कुशलता और सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। दोनों सर्जरी न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. तेजस कामत ने कीं। इस दौरान कान, नाक एवं गला रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वासंती पाटील का महत्वपूर्ण सहयोग मिला।

इस उपलब्धि पर डॉ. तेजस कामत ने कहा कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की आधुनिक और जटिल सर्जरी का सफल होना पूरे संस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि उचित योजना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और विशेषज्ञों के सहयोग से यह सफलता हासिल हुई।

इस उपलब्धि के लिए चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ का मार्गदर्शन मिला। अस्पताल के डीन डॉ. सदानंद भिसे, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र मदने, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गिरीष कांबळे, शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. वसंत देशमुख और कान, नाक एवं गला रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अजित लोकरे का भी योगदान रहा। इसके अलावा एनेस्थीसिया विभाग, एक्स-रे विभाग और नर्सिंग कर्मचारियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सीपीआर अस्पताल में इन दोनों जटिल सर्जरी की सफलता से आम मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के अंतर्गत अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। इससे महंगे उपचार के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

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