८० वर्षीय किसानों के आमरण अनशन पर चार दिन बाद जागा प्रशासन, सीमांकन का मिला लिखित आश्वासन
कोरपना में ८० वर्षीय किसानों के चार दिन के आमरण अनशन के बाद प्रशासन ने सीमांकन का लिखित आश्वासन दिया, विवादित जमीन पर कार्रवाई हुई।
तस्वीर में कोरपना तहसील कार्यालय के सामने अनशन समाप्त होने के बाद अधिकारी किसानों को दस्तावेज सौंपते हुए नजर आ रहे हैं।
कोरपना तहसील कार्यालय के सामने अपने हक की कृषि भूमि के लिए आमरण अनशन कर रहे ८० वर्षीय किसानों की मांग पर आखिरकार चार दिन बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया। भूमि अभिलेख कार्यालय ने मौके की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की और विवादित स्थान का विवाद निपटाए जाने की जानकारी दी। साथ ही संबंधित किसानों की भूमि का प्रत्यक्ष सीमांकन कराए जाने का लिखित पत्र भूमि अभिलेख कार्यालय की ओर से अनशनकारियों को सौंपा गया। इसके बाद तहसीलदार, भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारी और पुलिस निरीक्षक की मौजूदगी में नींबू शरबत पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
मौजा कोडशी खुर्द निवासी ८० वर्षीय किसान नानाजी तुकाराम बोरडे और बापूराव तुकाराम बोरडे अपने हक की कृषि भूमि को लेकर कोरपना तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठे थे। अनशनकारियों का आरोप था कि सरकारी माप का प्रमाण उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की जा रही थी।
क्या है पूरा मामला
बताया गया कि नानाजी बोरडे की मौजा कोडशी खुर्द स्थित सर्वे नंबर ५८ में कृषि भूमि है। इस भूमि की आधिकारिक सरकारी माप रजिस्टर क्रमांक ११७९ के तहत २३ मार्च २०२३ को की गई थी। भूमि अभिलेख कार्यालय से प्राप्त ‘क प्रत’ माप नक्शे के आधार पर खेत की सीमा को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। बोरडे ने आरोप लगाया था कि पड़ोसी किसानों की ओर से उनकी जमीन में अतिक्रमण किया गया है।
इस मामले में अवैध बाड़ हटाकर सरकारी माप के अनुसार सीमा निर्धारित करने की मांग की गई थी। अनशनकारियों के अनुसार, इसके लिए १० जुलाई २०२३ को तहसील कार्यालय में आवेदन भी दिया गया था।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए बोरडे ने अंततः तहसील कार्यालय के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। बिगर सातबारा किसान संगठन के भाई जगदीश कुमार इंगले के नेतृत्व में आंदोलन किया गया। संबंधित अधिकारियों, तलाठी और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई।
अनशन शुरू होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और भूमि अभिलेख विभाग के माध्यम से मौके पर प्रत्यक्ष जांच कराई। जांच के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
सीमांकन का मिला लिखित आश्वासन
मौके की जांच के बाद प्रशासन की ओर से बताया गया कि विवादित स्थान से संबंधित मामला निपटा दिया गया है। साथ ही संबंधित किसानों की कृषि भूमि का सीमांकन कराए जाने का लिखित पत्र भूमि अभिलेख कार्यालय ने अनशनकारियों को सौंपा। प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद चार दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया गया।
इस दौरान भूमि अभिलेख कार्यालय के अधिकारी, कोरपना तहसीलदार और पुलिस निरीक्षक मौजूद रहे। अधिकारियों ने अनशनकारियों को नींबू शरबत पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
चार दिनों के आंदोलन के बाद ८० वर्षीय किसानों की मांग पर प्रशासन की ओर से संज्ञान लिए जाने से उन्हें राहत मिली है। हालांकि, प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार प्रत्यक्ष सीमांकन की कार्रवाई तत्काल पूरी कर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।