तस्वीर में एक तरफ पुरानी संरचनाएं और दूसरी तरफ ऊंची इमारतें दिख रही हैं।

दक्षिण मुंबई के कामाठीपुरा परिसर के समूह पुनर्विकास प्रकल्प ने अब एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है। म्हाडा के मुंबई दुरुस्ती और पुनर्रचना मंडळ तथा नियुक्त कंत्राटदार कंपनी के बीच गुरुवार को करार किया गया। इसके साथ ही 8,001 रहिवाशियों की पात्रता निश्चिती और संमती पत्र लेने की प्रक्रिया शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रक्रिया दिवाली से शुरू होने की संभावना है और इसके पूरा होने के बाद 2027 में पुनर्विकास के प्रत्यक्ष काम की शुरुआत हो सकती है।

दक्षिण मुंबई के कामाठीपुरा परिसर का समूह पुनर्विकास म्हाडा के मुंबई दुरुस्ती और पुनर्रचना मंडळ की ओर से कन्स्ट्रक्शन अँड डेव्हलपमेंट एजन्सी (सी अँड डी) प्रारूप के तहत किया जाएगा। इसके लिए दुरुस्ती मंडळ ने सी अँड डी कंपनी नियुक्त की है। प्रकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में गुरुवार को दुरुस्ती मंडळ और कंत्राटदार कंपनी के बीच करार हुआ।

कामाठीपुरा परिसर में करीब 34 एकड़ क्षेत्र में 943 इमारतें हैं, जिनमें लगभग आठ हजार रहिवासी रहते हैं। ये इमारतें अब दुरुस्ती की सीमा से आगे जा चुकी हैं, इसलिए इनके पुनर्विकास की आवश्यकता है। इन इमारतों के रखरखाव और दुरुस्ती की जिम्मेदारी दुरुस्ती मंडळ के पास है। राज्य सरकार ने पुनर्विकास की जिम्मेदारी भी दुरुस्ती मंडळ को सौंपी है। इसके बाद मंडळ ने निविदा प्रक्रिया के माध्यम से भागीरथी हाऊसिंग प्रा. लि. और माथी डेव्हलपर्स की (एएटीके कन्स्ट्रक्शन) कन्स्ट्रक्शन अँड डेव्हलपमेंट एजन्सी के रूप में नियुक्ति की।

प्रकल्प का विस्तृत आराखडा तैयार किया जा चुका है। हाल ही में इसका प्रस्तुतीकरण रहिवाशियों के सामने किया गया था और उन्हें प्रकल्प की पूरी जानकारी दी गई थी। इसके बाद प्रकल्प को प्रत्यक्ष रूप से आगे बढ़ाने के लिए दुरुस्ती मंडळ और नियुक्त कंपनी के बीच करार किया गया। म्हाडा उपाध्यक्ष संजीव जयस्वाल की मौजूदगी में दुरुस्ती मंडळ के मुख्य अधिकारी मिलिंद शंभरकर और विकासक कंपनी के संचालक अतुल गोयल ने करार पर हस्ताक्षर किए।

इस दौरान विकासक और म्हाडा की ओर से दावा किया गया कि कामाठीपुरा की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखते हुए पुनर्विकास अंतरराष्ट्रीय स्तर के और टिकाऊ विकास के रूप में किया जाएगा।

करार होने के बाद अब दिवाली से कामाठीपुरा के 8,001 रहिवाशियों की पात्रता निश्चित करने का काम शुरू किया जाएगा। इसी के साथ रहिवाशियों की संमती लेने की प्रक्रिया भी शुरू होगी। दुरुस्ती मंडळ के अधिकारियों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रहिवाशियों से घर खाली करवाए जाएंगे। इसके बाद इमारतों को गिराकर पुनर्विकास का प्रत्यक्ष काम शुरू किया जाएगा। 2027 में पुनर्विकास के प्रत्यक्ष काम की शुरुआत होने की संभावना है।

पुनर्विकास योजना के अनुसार करीब 34 एकड़ क्षेत्र में कुल 1,292 इमारतें शामिल हैं। इनमें 943 उपकरप्राप्त और 349 विना-उपकरप्राप्त इमारतें हैं। कुल 8,001 रहिवाशियों का पुनर्वसन किया जाएगा, जिनमें 6,625 निवासी और 1,376 व्यावसायिक किरायेदार शामिल हैं। 800 जमीन मालिकों का भी पुनर्वसन किया जाएगा।

योजना के तहत रहिवाशियों को 500 वर्ग फुट के घर दिए जाएंगे और प्रत्येक सदनिका के लिए 5 लाख रुपये का कॉर्पस फंड दिया जाएगा। पुनर्वसित इमारतें 40 से 50 मंजिल की होंगी, जबकि बिक्री के लिए बनाई जाने वाली इमारतें 60 से 80 मंजिल की होंगी। पुनर्विकास के माध्यम से म्हाडा के दुरुस्ती मंडळ को करीब 44,000 वर्गमीटर गृहसाठा उपलब्ध होगा, जिससे करीब 900 अतिरिक्त गृहनिर्माण सदनिकाओं के निर्माण का प्रस्ताव है। रहिवाशियों को हर महीने 25 हजार रुपये घरभाड़ा मिलेगा, जबकि अनिवासी रहिवाशियों को हर महीने 25 हजार से 35 हजार रुपये तक घरभाड़ा दिया जाएगा।

म्हाडा और कंत्राटदार के बीच हुए इस करार के बाद कामाठीपुरा समूह पुनर्विकास की अगली प्रक्रिया अब रहिवाशियों की पात्रता और संमती से जुड़ गई है। इसके बाद घर खाली कराने, पुरानी इमारतों के पाडकाम और 2027 में प्रस्तावित प्रत्यक्ष पुनर्विकास कार्य की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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