कागल को दुष्काळी तालुकों की सूची में शामिल करने की मांग, कांग्रेस ने सौंपा ज्ञापन
कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त सूची में शामिल करने की मांग तेज हुई है। कांग्रेस कमेटी ने वर्षा, फसल नुकसान, बांधों के जलसंचय और चारे की स्थिति का वस्तुनिष्ठ आकलन कर ‘ट्रिगर-1’ सूची में शामिल करने की मांग की।
तस्वीर में बाएं से कागल तालुका कांग्रेस कमेटी के तालुकाध्यक्ष एडवोकेट दयानंद पाटील-नंद्याळकर, बीच में चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ और दाएं एक अन्य पदाधिकारी नजर आ रहे हैं, जो ज्ञापन सौंपते हुए दिखाई दे रहे हैं।
कोल्हापुर जिले के कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की सूची से बाहर रखे जाने के बाद कागल तालुका कांग्रेस कमेटी ने इसे ‘ट्रिगर-1’ पूरक सूची में शामिल करने की मांग की है। कमेटी ने तालुका में वास्तविक वर्षा, फसल की स्थिति, बांधों में जलसंचय और खरीफ फसलों को हुए नुकसान का वस्तुनिष्ठ आकलन कराने की मांग की है।
इस संबंध में तालुकाध्यक्ष एडवोकेट दयानंद नानासाहेब पाटील-नंद्याळकर के नेतृत्व में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री नामदार हसन मुश्रीफ को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतियां पालकमंत्री नामदार प्रकाश आबिटकर, सांसद शाहू छत्रपति, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विधायक सतेज उर्फ बंटी पाटील और तहसीलदार अमरदीप वाकडे को भी दी गईं।
शासन ने 25 सितंबर 2026 को राज्य के 265 तालुकों को दुष्काळग्रस्त घोषित किया है। इनमें कोल्हापुर जिले के छह तालुके शामिल हैं। कागल तालुका को अत्यधिक वर्षा वाले तालुका के रूप में दुष्काळ की सूची से बाहर रखा गया है। कांग्रेस कमेटी ने ज्ञापन में दावा किया है कि इस वर्ष तालुका की वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
कागल तालुका में औसतन 750 मिलीमीटर वर्षा अपेक्षित है, जबकि अब तक केवल करीब 420 मिलीमीटर बारिश हुई है। दूधगंगा और वेदगंगा नदी क्षेत्र के तालुका के मध्य और पूर्वी हिस्से के 45 से 50 गांवों में खरीफ फसलों के लिए आवश्यक वर्षा नहीं हुई। इससे फसल आनेवारी में बड़ी गिरावट आई है। सिद्धनेर्ली और कागल राजस्व मंडल के कई हिस्से दुष्काळ जैसी स्थिति में होने का उल्लेख ज्ञापन में किया गया है।
तालुका के पश्चिमी हिस्से में चिकोत्रा नदी घाटी के 30 से 35 गांव पहाड़ी और तीव्र ढलान वाले क्षेत्र में हैं। कम वर्षा के कारण बारिश पर निर्भर सोयाबीन और धान की फसलें सूखकर खराब हो गई हैं। कुछ किसानों ने दोबारा बुआई की, लेकिन भरणी के समय बारिश नहीं होने और तांबेरा रोग के कारण उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है। ज्ञापन में कहा गया है कि सोयाबीन की उपज प्रति एकड़ तीन क्विंटल से भी कम रहने की संभावना है।
चिकोत्रा परियोजना में बारिश के मौसम की शुरुआत में 32 प्रतिशत जलसंचय शेष था। इस वर्ष बांध में केवल 62 प्रतिशत जलसंचय हुआ है। इसके कारण सोयाबीन, धान, मक्का और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों को 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने का दावा किया गया है। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से गन्ने की वृद्धि भी प्रभावित हुई है और आगामी गन्ना रोपाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। चिकोत्रा परियोजना पूरी क्षमता से नहीं भरने पर गर्मियों में उपसा बंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे 52 गांवों की जलापूर्ति का प्रश्न गंभीर होने की चिंता व्यक्त की गई है।
अपर्याप्त बारिश के कारण कई स्थानों पर दोबारा बुआई के बावजूद सोयाबीन और धान का अपेक्षित उत्पादन नहीं हुआ है। चारे की कमी के कारण पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है। वेदगंगा और चिकोत्रा नदियों पर बने कोल्हापुरी पद्धति के कुछ बंधारे खराब होने के कारण पानी जमा नहीं रह रहा है। तालुका के लघु सिंचाई तालाबों में भी केवल 20 से 25 प्रतिशत जलसंचय है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह जलसंचय करीब 70 प्रतिशत था।
कांग्रेस कमेटी ने मांग की है कि शासन केवल बारिश के आंकड़ों पर निर्भर न रहे, बल्कि वर्षा, फसल क्षेत्र, फसल नुकसान, सिंचाई परियोजनाओं में जलसंचय और चारे की उपलब्धता का समग्र आकलन करे। कृषि विभाग से वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट मंगाकर कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की ‘ट्रिगर-1’ पूरक सूची में शामिल किया जाए और किसानों को शासन की दुष्काळ राहत सुविधाएं लागू की जाएं।
फोटो : कागल तालुका को दुष्काळग्रस्त तालुकों की सूची में शामिल करने की मांग का ज्ञापन चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ को सौंपते कागल तालुका कांग्रेस कमेटी के तालुकाध्यक्ष एडवोकेट दयानंद पाटील-नंद्याळकर और पदाधिकारी।