कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुळ) के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए चुनाव प्रक्रिया अगले 60 दिनों के भीतर पूरी करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। इससे पहले 90 दिनों में चुनाव कराने के आदेश के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं करने पर न्यायालय ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कच्ची मतदाता सूची अब तक प्रकाशित नहीं किए जाने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और चुनाव के लिए समय बढ़ाने की मांग को लेकर दोबारा न्यायालय का रुख नहीं करने की स्पष्ट चेतावनी दी।

महाराष्ट्र सरकार ने गोकुळ दूध संघ का चुनाव कराने के लिए नए सिरे से चार महीने की अवधि मांगी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की मांग खारिज करते हुए 60 दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। अब सरकार को तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित कर प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

सुनवाई के दौरान हासूर दुमाला (तालुका करवीर) स्थित कै. राऊ सखाराम पाटील सहकारी दूध संस्था की ओर से वरिष्ठ विधिज्ञ एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने प्रभावी पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं करने के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई किए जाने की मांग उन्होंने की। उनके साथ एडवोकेट आनंद लांडगे और एडवोकेट भूषण मंडलिक ने भी पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील एडवोकेट सिद्धार्थ धर्माधिकारी ने पक्ष रखा।

इससे पहले पुंगाव (तालुका राधानगरी) स्थित श्री स्वामी समर्थ सहकारी दूध संस्था की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2026 को गोकुळ दूध संघ का चुनाव 90 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था। यह 90 दिनों की अवधि 3 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई। इसके बाद राज्य सरकार ने 120 दिनों की अतिरिक्त अवधि मांगी थी। सरकार की इस मांग के विरोध में हासूर दुमाला स्थित कै. राऊ सखाराम पाटील सहकारी दूध संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है।

यह अवमानना याचिका अभी भी लंबित है। चुनाव प्रक्रिया तत्काल शुरू नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालयीन कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद गोकुळ दूध संघ के चुनाव का रास्ता अब साफ हो गया है और चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित किए जाने की संभावना है।

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