सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में डॉ. एस. आर. रंगनाथन की १३४वीं जयंती उत्साह से मनाई गई
मुरगूड के सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में डॉ. एस. आर. रंगनाथन की १३४वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में ग्रंथालय के महत्व, वाचन संस्कृति और ज्ञाननिर्माण में पुस्तकालय की भूमिका पर मार्गदर्शन हुआ।
तस्वीर में कोल्हापुर के सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय में डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के अवसर पर उपस्थित प्राचार्य, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर के मुरगूड स्थित सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय के महात्मा फुले ग्रंथालय में ग्रंथालयशास्त्र के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन की १३४वीं जयंती उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रंथालय के महत्व, वाचन संस्कृति और डॉ. रंगनाथन के ग्रंथालय क्षेत्र में योगदान पर मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. एम. होडगे ने की। प्रमुख वक्ता के रूप में तरुण भारत के पत्रकार तथा शिवराज जूनियर कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रा. रवींद्र शिंदे उपस्थित रहे। प्रारंभ में प्रा. मनिषा पाटील ने स्वागत एवं प्रस्तावना प्रस्तुत की। इसके बाद प्राचार्य डॉ. होडगे और प्रमुख वक्ता प्रा. शिंदे ने डॉ. एस. आर. रंगनाथन की प्रतिमा का पूजन किया।
प्रमुख वक्ता प्रा. रवींद्र शिंदे ने अपने मार्गदर्शन में डॉ. रंगनाथन के जीवनकार्य का अवलोकन करते हुए आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में ग्रंथालय के अनन्यसाधारण महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ने की आदत विकसित करते हुए ग्रंथालय का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। ग्रंथालय केवल पुस्तकें उपलब्ध कराने वाला केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञाननिर्माण का प्रभावी माध्यम है।
अध्यक्षीय समापन में प्राचार्य डॉ. एस. एम. होडगे ने विद्यार्थियों से ग्रंथालय का अधिकाधिक उपयोग कर अपने ज्ञान की सीमाओं को व्यापक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर नैक समन्वयक डॉ. माणिक पाटील, प्रा. नितेश रायकर, प्रा. राम पाटील, प्रा. संजय हेरवाडे, प्रा. अवधूत पाटील, ग्रंथालय परिचर सदाशिव गिरीबुवा तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ग्रंथालय परिचर एवं सामाजिक कार्यकर्ता साताप्पा कांबले ने किया, जबकि प्रा. डॉ. सुखदेव एकल ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. एस. आर. रंगनाथन के ग्रंथालय क्षेत्र में योगदान के साथ विद्यार्थियों के लिए वाचन संस्कृति और ग्रंथालय के प्रभावी उपयोग के महत्व को रेखांकित किया गया।