रीठी अस्पताल में एंबुलेंस के लिए घंटों तड़पता रहा घायल युवक, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
कटनी के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जिला अस्पताल रेफर किए गए 28 वर्षीय घायल युवक को घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। अस्पताल के गेट पर दर्द से कराहते मरीज की स्थिति ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कटनी के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस के इंतजार में बैठे घायल युवक और उनके परिजन।
कटनी जिले के रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां जिला अस्पताल रेफर किए गए 28 वर्षीय घायल युवक को एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। इस दौरान युवक अस्पताल के गेट पर दर्द से कराहता रहा, लेकिन उसे समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, ग्राम कछारखेड़ा निवासी 28 वर्षीय युवक घर की पुताई कर रहा था। इसी दौरान अचानक सीढ़ियों से गिरने के कारण उसके पैर में गंभीर चोट लग गई। घटना के बाद परिजन उसे तत्काल उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी लेकर पहुंचे।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने युवक की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल कटनी रेफर कर दिया। इसके बाद उसे जिला अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की आवश्यकता थी, लेकिन रेफर किए जाने के बावजूद एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी।
परिजन घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाने के लिए घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। वहीं, अस्पताल के गेट पर मौजूद युवक पैर में लगी चोट के दर्द से लगातार कराहता रहा। आपातकालीन स्थिति में समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिलने से मरीज और उसके परिजनों की परेशानी बढ़ती रही।
इस घटना ने रीठी जैसे तहसील मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किए गए मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को आपातकालीन परिस्थितियों में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा, यह सवाल भी सामने आया है।
खबर लिखे जाने तक घायल युवक अस्पताल के गेट पर एंबुलेंस के इंतजार में दर्द से तड़प रहा था। अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।