डिंडौरी पुलिस लाइन में विजयादशमी पर हुआ शस्त्र पूजन, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने की सहभागिता
विजयादशमी के अवसर पर डिंडौरी पुलिस लाइन में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया।
डिंडौरी के रक्षित केंद्र पुलिस लाइन में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम के दौरान वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई।
डिंडौरी। विजयादशमी के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन, रक्षित केंद्र डिंडौरी में शस्त्र पूजन कार्यक्रम परंपरागत विधि-विधान और श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया। इस दौरान पुलिस विभाग के शस्त्रों का विधिवत पूजन कर सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, कलेक्टर अंजु पवन भदौरिया और पुलिस अधीक्षक आशीष खरे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनके अलावा एसडीएम रामबाबू देवांगन, नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस, पंकज सिंह टेकाम और रेडक्रॉस अध्यक्ष नरेंद्र राजपूत सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
भारतीय संस्कृति में विजयादशमी को अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी परंपरा के तहत पुलिस लाइन डिंडौरी में पुलिस विभाग के शस्त्रों का पूजन किया गया। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुए इस कार्यक्रम में शस्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए शांति, सुरक्षा और जनकल्याण की भावना को प्रमुखता दी गई।
पुलिस विभाग में शस्त्र पूजन की परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, साहस और समाज की सुरक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल की जिम्मेदारियों और नागरिकों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया। इस आयोजन के माध्यम से कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जनसेवा के प्रति पुलिस विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
विजयादशमी का पर्व पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, संयम और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। पुलिस लाइन, रक्षित केंद्र डिंडौरी में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्रसेवा की भावना का संगम रहा। इस अवसर पर शस्त्रों के पूजन के साथ समाज में शांति, सद्भाव और सुरक्षा का संदेश भी मजबूत किया गया।