कोटा के व्यापार-उद्योग जगत ने जीएसटी की विसंगतियां दूर करने की मांग उठाई, सुझाव जीएसटी काउंसिल को भेजे जाएंगे
कोटा में व्यापार-उद्योग संगठनों ने जीएसटी व्यवस्था की विभिन्न विसंगतियों को लेकर विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर अहम सुझाव दिए। लीज होल्ड राइट, RCM, जीएसटी दर और ठेकेदारों के भुगतान सहित कई मुद्दों पर उठी मांगों को अब जीएसटी काउंसिल तक भेजे जाने का आश्वासन दिया गया।
तस्वीर में कोटा जीएसटी कार्यालय में व्यापार महासंघ के प्रतिनिधि और अधिकारी एक बैठक के दौरान चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं।
कोटा, 5 अगस्त 2026। जीएसटी व्यवस्था में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों के समाधान की मांग को लेकर कोटा व्यापार महासंघ, दी एसएसआई एसोसिएशन, टैक्स बार एसोसिएशन एवं कोटा कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को जीएसटी कार्यालय में उपायुक्त सुनीता डांगा और सहायक उपायुक्त अनुपम शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार और उद्योग जगत से जुड़ी कई महत्वपूर्ण समस्याओं को उठाते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग की।
बैठक में कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, महासचिव अशोक माहेश्वरी, दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल, अध्यक्ष दीपक मेहता, कोषाध्यक्ष राहुल जैन, टैक्स बार एसोसिएशन के राजकुमार जैन, यशवंत लोढ़ा तथा कोटा कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील गर्ग सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि लीज होल्ड राइट वाले भूखंडों पर जीएसटी लगाया जाना व्यापारियों के लिए बड़ी विसंगति है, जिसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकारी वर्क ऑर्डर जारी होने के समय जीएसटी की दर 12 प्रतिशत थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बावजूद राजस्थान में किए गए कार्यों का भुगतान अभी भी 12 प्रतिशत जीएसटी के आधार पर किया गया, जबकि अन्य राज्यों में संशोधित 18 प्रतिशत की दर से भुगतान हुआ। उन्होंने कहा कि इस स्थिति के कारण प्रदेश के ठेकेदारों के लगभग 2,000 करोड़ रुपये के भुगतान प्रभावित हो रहे हैं और इस समस्या का शीघ्र समाधान आवश्यक है।
दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने कहा कि रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) से जुड़ी विसंगतियों के कारण उद्योग जगत को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये की जीएसटी छूट सीमा को बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने, कंपोजिशन स्कीम को और सरल बनाने तथा एडवांस भुगतान पर माल की डिलीवरी होने तक जीएसटी देयता लागू नहीं करने की मांग भी रखी।
जीएसटी उपायुक्त सुनीता डांगा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि व्यापारियों एवं उद्यमियों द्वारा दिए गए सभी सुझाव जीएसटी काउंसिल तक भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग व्यापार एवं उद्योग जगत के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य कर रहा है। साथ ही उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे फर्जी बिलिंग करने वाले सप्लायरों के साथ किसी भी प्रकार का लेन-देन न करें।
सहायक उपायुक्त अनुपम शर्मा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाली समस्याओं का निराकरण किया जाएगा, जबकि नीतिगत बदलाव केवल जीएसटी काउंसिल के स्तर पर ही संभव हैं। उन्होंने कहा कि विभाग सभी सुझाव राज्य सरकार एवं जीएसटी काउंसिल तक पहुंचाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग जीएसटी चोरी के विरुद्ध पूरी तरह सतर्क है तथा नियमों के अनुरूप कार्य करने वाले व्यापारियों और उद्यमियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि जीएसटी के नियमों में समय-समय पर सरलीकरण किए जा रहे हैं और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।