श्री जी अस्पताल में ब्रोंकोस्कोपी से सिकुड़े फेफड़े का सफल इलाज, गंभीर मरीज की बहु-विषयक टीम ने बचाई जान

62 वर्षीय कोटा निवासी मरीज का श्री जी अस्पताल में ब्रोंकोस्कोपी से सिकुड़े फेफड़े का सफल इलाज हुआ। न्यूरोलॉजी और पल्मोनोलॉजी टीम के समन्वित प्रयास से जान बचाई गई।

Update: 2026-07-04 10:34 GMT

श्री जी अस्पताल में मरीज के उपचार के बाद डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की टीम।

कोटा निवासी 62 वर्षीय स्ट्रोक से पीड़ित मरीज को अत्यंत गंभीर अवस्था में श्री जी अस्पताल लाया गया, जहां न्यूरोलॉजी एवं पल्मोनोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम ने दूरबीन द्वारा सिकुड़े हुए फेफड़े की जटिल बीमारी का सफल इलाज कर मरीज की श्वसन स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया।

अस्पताल के अनुसार मरीज पहले से गंभीर अस्थमा से पीड़ित था। उपचार के दौरान उसे एस्पिरेशन निमोनिया हो गया, जिसके कारण उसका एक फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया (लंग कोलैप्स) और उसे सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने लगी। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए न्यूरोलॉजी एवं पल्मोनोलॉजी विभाग की टीमों ने समन्वित रूप से उपचार शुरू किया।

हॉस्पिटल के वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. विदित सक्सेना ने सही समय पर ब्रोंकोस्कोपी की, जिससे बंद हुआ फेफड़ा पुनः पूरी तरह फैल गया और मरीज की श्वसन स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसके बाद दुर्लभ पाए जाने वाले ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया की जांच के लिए BAL (ब्रोंको अल्वीलर लावेज) का सैंपल भेजा गया।

इस प्रक्रिया के दौरान टीम में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. विदित सक्सेना, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक राठौर, एनेस्थीसिओलॉजिस्ट डॉ. शिवम् अग्रवाल तथा टेक्नीशियन सुनील उपस्थित रहे।

श्री जी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राकेश जिंदल ने बताया कि यह मामला बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) टीमवर्क और अत्यंत आधुनिक उपकरणों द्वारा किए गए उपचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें न्यूरोलॉजी एवं पल्मोनोलॉजी विभागों के समन्वित प्रयासों से मरीज की जान बचाई जा सकी।

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