बेटे का आईआईटी सपना पूरा करने को मां बनी सहपाठी, बीमारी के बीच बनाए नोट्स और मिली बड़ी सफलता

गुंजन कुमार ने न्यूमोथोरेक्स जैसी गंभीर बीमारी और कमजोर आंखों की रोशनी के बावजूद जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल की। तीन महीने तक क्लास नहीं जा पाने पर उनकी मां गुंजा ने ऑनलाइन क्लास देखकर नोट्स तैयार किए, जो बेटे के आईआईटी दिल्ली पहुंचने की राह में अहम साबित हुए।

Update: 2026-07-04 13:31 GMT

तस्वीर में गुंजन कुमार और उनकी मां गुंजा अध्ययन के दौरान एलन करियर इंस्टीट्यूट, कोटा में दिखाई दे रहे हैं।

कोटा में रहकर सफलता की नई कहानी लिखने वाले विद्यार्थियों के पीछे माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन की अहम भूमिका होती है। इस बार जेईई-एडवांस्ड में सफलता हासिल करने वाले एक छात्र की उपलब्धि के पीछे उसकी मां का ऐसा योगदान सामने आया है, जिसने कठिन परिस्थितियों में बेटे की पढ़ाई का जिम्मा अपने हाथों में लेकर उसे आईआईटी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह कहानी बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार और उनकी मां गुंजा की है। गुंजन ने दो वर्ष तक कोटा में रहकर एलन करियर इंस्टीट्यूट से जेईई की तैयारी की, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले वह न्यूमोथोरेक्स (फेफड़ा कोलेप्स होने) की गंभीर समस्या का शिकार हो गया। इस बीमारी के कारण वह लगातार तीन महीने तक बिस्तर पर रहा और क्लास भी अटेंड नहीं कर सका।

इस दौरान उसकी मां गुंजा ने पढ़ाई का नुकसान नहीं होने दिया। गृहिणी होने के साथ बीएड कर चुकीं गुंजा स्वयं कोटा में बेटे के साथ रहीं। उन्होंने ऑनलाइन क्लास के वीडियो गुंजन को दिखाने के साथ-साथ खुद भी वे क्लासेज देखीं और उनके विस्तृत नोट्स तैयार किए। बरसों बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करते हुए उन्होंने जो नोट्स बनाए, वही बाद में गुंजन की तैयारी का आधार बने।

गुंजन की आंखों की रोशनी भी काफी कमजोर है। उसकी 70 प्रतिशत से अधिक आई-साइट वीक है और वह 9.5 नंबर का चश्मा पहनता है। इसके बावजूद उसने जेईई मेन में 91.8 पर्सेन्टाइल हासिल की। वहीं जेईई एडवांस्ड में उसे पीडब्ल्यूडी ओबीसी कैटेगरी रैंक 50 और कॉमन रैंक पीडब्ल्यूडी 120 प्राप्त हुई। अब वह आईआईटी दिल्ली में सीएस ब्रांच में प्रवेश लेकर आईआईटीयन बनने का अपना सपना पूरा करने जा रहा है। उसके पिता राजनारायण प्रसाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में इंजीनियर हैं, जबकि उसका छोटा भाई वर्तमान में कोटा में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा है।

रिजल्ट आने के बाद गुंजन ने कहा कि परिस्थितियां हमेशा हमारे समर्थन में नहीं रहतीं। परीक्षा केवल पढ़ाई की नहीं बल्कि हौसले की भी होती है। उसने पहले ही तय कर लिया था कि एलन कोटा में पढ़कर आईआईटी-जेईई क्रैक करनी है और इसके लिए उसने पूरी कोशिश की। बीमारी के दौरान मां का सहयोग परीक्षा से पहले बहुत काम आया। फैकल्टीज के मार्गदर्शन से वह सफल हो सका। उसने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखते हुए आगे की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।

गुंजन की मां गुंजा ने कहा कि बेटे का सपना ही उनका सपना है। जब गुंजन बीमार हुआ तो वह भी कुछ समय के लिए चिंतित हुईं, लेकिन इसके बाद दोनों ने साथ बैठकर ऑनलाइन वीडियो देखे और उन्होंने स्वयं नोट्स तैयार किए। बाद में जब उनके बनाए नोट्स गुंजन की तैयारी में उपयोगी साबित हुए तो उन्हें बेहद खुशी हुई।

एलन करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि कोटा केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं बल्कि अभिभावकों के लिए भी वास्तविक प्रेरणा का केंद्र है। यह शहर सिर्फ परीक्षा में सफलता के लिए पढ़ाई नहीं करवाता, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने और चुनौतियों का सामना करना भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि गुंजन की कहानी विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणादायक है।

गुंजन ने अपनी आंखों की कमजोरी को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उसने 10वीं कक्षा 82.5 प्रतिशत और 12वीं कक्षा 70 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। कोटा आने से पहले उसने स्वयं जेईई की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ कोचिंग की जानकारी जुटाई। इसी दौरान उसने वर्ष 2021 में जेईई मेन और एडवांस्ड के ऑल इंडिया टॉपर तथा एलन के छात्र मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा। उनकी सफलता से प्रेरित होकर उसने भी कोटा जाकर तैयारी करने का फैसला किया। उसने अपने माता-पिता से कोटा भेजने की जिद की। बेटे की लगन को देखते हुए परिवार ने उसका पूरा साथ दिया और वर्ष 2023 में उसे कोटा भेजा, जहां उसने एलन करियर इंस्टीट्यूट में प्रवेश लेकर अपने सपनों को आकार देना शुरू किया।

कोटा आने के बाद उसकी तैयारी सामान्य रूप से चल रही थी, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले जिंदगी ने उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। 5 अक्टूबर 2025 को उसने इंस्टीट्यूट में रूटीन टेस्ट दिया। अगले दिन उसके सीने में दर्द शुरू हुआ। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि अत्यधिक भारी सामान उठाने की वजह से उसके बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वह कोलेप्स हो गया। न्यूमोथोरेक्स की इस समस्या के बाद उसे करीब तीन महीने तक बेड रेस्ट करना पड़ा। जनवरी में होने वाली परीक्षा से पहले आई इस चुनौती के बावजूद मां के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर गुंजन ने सफलता हासिल कर आईआईटी दिल्ली में प्रवेश का सपना साकार कर लिया।

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