कोटा के जैन मंदिर में माइक पर बोलते व्यक्ति और हाथ जोड़े खड़े श्रद्धालु दिख रहे हैं।

कोटा। भगवान महावीर स्वामी का जीवन वीतरागता, संयम और नियमों के दृढ़ पालन की ऐसी प्रेरणा देता है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देती है। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने भगवान महावीर स्वामी के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धर्म, पुरुषार्थ और संयम का महत्व बताया।

मुनिश्री ने बताया कि 1 नवंबर 2026 को भगवान महावीर स्वामी का 2553वां निर्वाण कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। महापुरुषों का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने और अपने संकल्पों का दृढ़ता से पालन करने की प्रेरणा देता है।

भगवान महावीर स्वामी के पूर्व पर्याय का प्रसंग सुनाते हुए मुनि विवर्धन सागर महाराज ने बताया कि वे पूर्व पर्याय में पुरुरवा भील थे। एक बार जंगल में उन्हें सागरसेन मुनिराज के दर्शन हुए। मुनिराज के उपदेश और आशीर्वाद से पुरुरवा भील ने कौवे का मांस सेवन नहीं करने का आजीवन नियम लिया। कठिन परिस्थितियां आने के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प को नहीं तोड़ा। नियम के प्रति इसी अटूट दृढ़ता के फलस्वरूप मृत्यु के बाद वे सौधर्म स्वर्ग में देव बने। मुनिश्री ने कहा कि जीवन में कैसी भी परिस्थिति आए, धर्म के लिए लिए गए नियमों का पालन पूरी दृढ़ता के साथ करना चाहिए।

उन्होंने भरत चक्रवर्ती के पुत्र मरीचि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अहंकार व्यक्ति को मोक्षमार्ग से भी विचलित कर सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सम्यक भावना के साथ मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने का निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। देव, शास्त्र और गुरु की शरण को जीवन का उत्तम मंगल बताते हुए उन्होंने कहा कि जो भगवान के चरणों का आश्रय लेते हैं, उन्हें संसार रूपी भवसागर से पार उतरने का मार्ग प्राप्त होता है।

मुनिश्री ने बताया कि आज ध्यान तेरस है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी ने ध्यान प्रारंभ कर योग निरोध किया था। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, ध्यान और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने तथा किमिच्छक दान की परंपरा को बनाए रखने का आह्वान किया।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि धर्मसभा में टीकम पाटनी, रामबाबू जैन, अशोक पापड़ीवाल, जयकुमार हरसौरा, निर्मल काला, जम्बू बज, संदीप बंसल, जम्बू हरसौरा एवं सुरेंद्र पहाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा में भगवान महावीर स्वामी के जीवन प्रसंगों के माध्यम से संयम, नियम पालन, सम्यक भावना और मोक्षमार्ग पर निरंतर पुरुषार्थ करने का संदेश दिया गया।

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