कोटा में कल्पद्रुम महामंडल विधान संपन्न, मुनि योगसागर ने दिया धर्म का संदेश
शरद पूर्णिमा और गुरु उपकार दिवस पर निकली भव्य शोभायात्रा में आचार्य विद्यासागर महाराज के योगदान को याद किया गया और विभिन्न झांकियां सजाई गईं।
कोटा में कल्पद्रुम महामंडल विधान के समापन पर शरद पूर्णिमा को भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
कोटा में शरद पूर्णिमा और गुरु उपकार दिवस के पावन अवसर पर श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान का भव्य समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस धार्मिक समारोह में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने धर्म, संस्कार, संयम और आत्मकल्याण का संदेश देते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन मनुष्य को अशुभ उपयोग से शुभ उपयोग की ओर ले जाते हैं। इस अवसर पर आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आध्यात्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान को स्मरण कर नमन किया गया।
मुनि श्री योगसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि धार्मिक आयोजन धर्म और संस्कारों के बीजारोपण का माध्यम हैं। इनके जरिए मनुष्य के जीवन में धर्म, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण की भावना जागृत होती है। उन्होंने कहा कि संसार में सभी प्रकार के पदार्थ उपलब्ध हैं, लेकिन व्यक्ति को उनकी प्राप्ति अपने पुण्य के उदय और कर्मों के अनुसार होती है।
गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रसिद्ध पंक्ति “सकल पदारथ हैं जग माहीं, कर्महीन नर पावत नाहीं” का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने समझाया कि पुण्य का अभाव होने पर व्यक्ति के मन में धार्मिक आयोजनों में शामिल होने, मंदिर जाने और दान-पुण्य करने की भावना भी उत्पन्न नहीं होती।
उन्होंने कहा कि मिथ्यादृष्टि जीव को जिनवाणी अच्छी नहीं लगती और वह धार्मिक प्रवचनों में रुचि लेने के बजाय उनसे दूर रहने की प्रवृत्ति रखता है। इसके विपरीत, जिनेंद्र भगवान की भक्ति, संतों के दर्शन, जिनवाणी का श्रवण और धर्म आराधना का अवसर प्राप्त करने वाले व्यक्ति वास्तव में भाग्यशाली हैं। मुनि श्री ने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं से ऐसे भव्य एवं मंगलमय आयोजनों में सहभागिता के अवसर का सदुपयोग कर अपने जीवन को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।
शरद पूर्णिमा पर निकली भव्य शोभायात्रा
श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान के समापन और शरद पूर्णिमा के अवसर पर आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें मुख्य इंद्र-इंद्राणियां पांच आकर्षक बग्घियों में सवार होकर शामिल हुए। विधान के अन्य इंद्र-इंद्राणियां पारंपरिक वेशभूषा में शोभायात्रा की शोभा बढ़ाते नजर आए। आयोजन में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज और मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ।
शोभायात्रा में बिजौलियां से आया श्रीजी का भव्य रथ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंजाब से आए बैंड, बूंदी के मशक बैंड और डीजे बैंड की प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण शोभायात्रा ने आयोजन को यादगार बना दिया।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन और योगदान पर आधारित झांकियां
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन, विचारों और समाजोत्थान के कार्यों को प्रदर्शित करने वाली विशेष झांकियां सजाई गईं। आचार्य श्री विद्यासागर पाठशाला और दादाबाड़ी पाठशाला की संयोजिकाओं ने आचार्य श्री के जीवन एवं आध्यात्मिक योगदान को दर्शाने वाला प्रतीकात्मक वटवृक्ष तैयार किया। इस वटवृक्ष पर उनके संघ के मुनिराजों और आर्यिका माताओं के चित्र लगाए गए, जो उनके आध्यात्मिक संघ और धर्म प्रभावना के प्रतीक बने।
इसके अतिरिक्त आचार्य श्री के प्रेरणादायी प्रकल्पों हथकरघा, प्रतिभास्थली, गौशाला और भाग्योदय तीर्थ सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों पर आधारित झांकियां भी सजाई गईं। इनके माध्यम से आचार्य श्री के विचारों, समाज के प्रति उनके योगदान तथा जीवदया, शिक्षा, स्वावलंबन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश प्रस्तुत किया गया।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान
समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, नवाचार्य श्री समयसागर जी महाराज और पूज्य पूर्णमति माताजी के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और उनके आध्यात्मिक योगदान का स्मरण किया।
हुकम जैन काका ने आचार्य श्री के राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, मातृभाषा, स्वदेशी और जीवदया से जुड़े विचारों का उल्लेख करते हुए उनके प्रेरणादायी संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। “इंडिया नहीं, भारत बोलो”, हिंदी भाषा के सम्मान एवं प्रचार, मांस निर्यात पर रोक और हथकरघा जैसे स्वावलंबन के प्रकल्पों के माध्यम से आचार्य श्री ने समाज को जो दिशा दी, उसे विशेष रूप से याद किया गया।
समारोह में धर्म, संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिक्षाओं के स्मरण, श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना के साथ संपन्न हुआ।
धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने किया पुण्यार्जन
श्री पुण्योदय अतिशय क्षेत्र में आयोजित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक सहभागिता कर पुण्यार्जन किया। प्रशासनिक मंत्री श्रीमती अर्चना जैन सर्राफ ने बताया कि श्रावक श्रेष्ठी सम्मान, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और शास्त्र भेंट का पुण्यलाभ प्राप्त करने वाले परिवारों के नाम तथा कलश स्थापना के पुण्यार्जक परिवार का विवरण प्राप्त होना शेष है।
श्री सुमित सेंकी और श्री मनोज बगड़ा ने बताया कि शांतिधारा का पुण्यार्जन श्री राजेन्द्र, हुकम काका एवं प्रकाश हरसोरा परिवार तथा श्रीमती सुशीला बाई, अशोक एवं राजकुमार ठोरा परिवार ने किया। भक्तामर विधान में भी श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक भाग लेकर पुण्यार्जन किया।
श्री सुनील माडिया के अनुसार, मुनि श्री योगसागर जी महाराज के आहारदान का पुण्यलाभ महेंद्र गोधा एवं लक्ष्मी गोधा परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि मुनि श्री प्रणवसागर जी महाराज के आहारदान का सौभाग्य छोटू लाल जी को मिला।
धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री की पूजन-अर्चना की, अर्घ्य समर्पित किए और जिनवाणी वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
गुरुवाणी से मिला सदाचार और आत्मकल्याण का संदेश
धार्मिक आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि इनकी सार्थकता तभी है, जब वे मनुष्य के जीवन में सदाचार, संयम, करुणा और आत्मकल्याण की भावना जागृत करें। जिनवाणी का श्रवण, संतों का सान्निध्य और जिनेंद्र भगवान की भक्ति मनुष्य को अशुभ विचारों से दूर कर शुभ कार्यों की ओर प्रेरित करते हैं। श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन इसी आध्यात्मिक संदेश और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की शिक्षाओं के स्मरण के साथ हुआ।