कोटा: कोचिंग छात्रों के तनाव निवारण को लेकर मंदिर में 525 दीपकों का स्वास्तिक महायज्ञ
विद्यार्थियों की मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए आयोजित अनुष्ठान के बाद विसर्जन की पवित्र रज से तैयार 108 'जेड प्लांट' निशुल्क बांटे जाएंगे।
तस्वीर में मंदिर प्रांगण में मंच पर संबोधित करते और बैठे अतिथि दिख रहे हैं।
कोटा, 23 सितम्बर। देश की कोचिंग राजधानी कोटा में देश के कोने-कोने से आए लाखों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य, मानसिक शांति, एकाग्रता, तीव्र बुद्धि और जीवन में सफलता की कामना को लेकर बुधवार को तलवंडी स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर में ‘स्वास्तिक चौमुखी दीप महायज्ञ अनुष्ठान’ का भव्य आयोजन किया गया। अनुष्ठान में 525 चौमुखी दीपों की 2100 पावन ज्योतियों से 36x36 फीट का विशाल स्वास्तिक जगमगा उठा।
कार्यक्रम को आशीर्वाद देने कुलम शक्तिपीठ से माता श्री नीति अंबा उपस्थित हुईं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, कोटा व्यापार महासंघ सचिव अशोक महेश्वरी, एलन के डायरेक्टर गोविंद महेश्वरी, राष्ट्रीय गुजराती समाज अध्यक्ष जीडी पटेल और वरिष्ठ मनो चिकित्सक डॉक्टर एमएल अग्रवाल का मंदिर समिति अध्यक्ष गोविंदनारायण अग्रवाल, महामंत्री जितेंद्र गोयल, सभापति राकेश अग्रवाल और रामकिशोर जी शर्मा ने माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
संबोधित करते हुए कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि शिक्षा नगरी कोटा में अध्ययनरत कोचिंग विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और तनावमुक्ति के लिए आयोजित यह ‘स्वास्तिक चौमुखी दीप महायज्ञ’ अत्यंत सराहनीय प्रयास है। 525 चौमुखी दीपों की 2100 पावन ज्योतियां विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मकता और नए आत्मविश्वास का संचार करेंगी।
विधायक शर्मा ने कहा कि भगवान गरुड़ारूढ़ गणेश जी विद्यार्थियों को एकाग्रता, दूरदर्शिता और सफलता प्रदान करें। कोटा में देश के कोने-कोने से आए विद्यार्थी हमारे परिवार का हिस्सा हैं। उनकी बेहतर शिक्षा के साथ-साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य एवं तनावमुक्त वातावरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल ने बताया कि यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान विद्यार्थियों को पढ़ाई के तनाव से मुक्ति दिलाने और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के उद्देश्य से समर्पित किया गया है। पावन अनुष्ठान के दौरान 5 प्रकांड वैदिक विद्वानों व पंडितों ने मुख्य यजमानों के साथ वेद मंत्रों का सस्वर पाठ किया।
मंदिर प्रांगण में 36x36 फीट का विशाल स्वास्तिक चिन्ह बनाया गया था, जिस पर 525 चौमुखी दीपक प्रज्ज्वलित किए गए। इन दीपों से प्रज्ज्वलित 2100 ज्योतियों की पावन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से संपूर्ण मंदिर परिसर अलौकिक तेज से भर गया। मान्यता है कि यह सकारात्मक ऊर्जा विद्यार्थियों के जीवन में चारों दिशाओं से ज्ञान, यश और समृद्धि का संचार करने के साथ-साथ उनके जीवन में व्याप्त नकारात्मकता, मानसिक तनाव और कालसर्प दोष का निवारण करती है।
अनुष्ठान के दौरान कोचिंग छात्रों ने मंदिर परिसर में स्थापित गरुड़ पर सवार भगवान श्री गणेश की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन किए। इस अनूठी प्रतिमा के हाथ में दर्शाए गए त्रिशूल के माध्यम से गणपति महाराज विद्यार्थियों के जीवन में आने वाले तनाव और नकारात्मक वायरसों का संहार करते प्रतीत होते हैं। पक्षीराज गरुड़ उच्च दृष्टिकोण, दूरदर्शिता और तीव्र गति के प्रतीक हैं। इस स्वरूप की पूजा से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और निर्धारित लक्ष्यों में सफलता प्राप्त करने की शक्ति का विकास होता है।
गरुड़ पर सवार भगवान श्री गणेश की इस दुर्लभ प्रतिमा का विसर्जन 25 सितम्बर को प्रातः 10 बजे मंदिर परिसर में बने ‘पर्यावरण संरक्षण प्रहरी गणेश विसर्जन कुण्ड’ में किया जाएगा।
राधा-कृष्ण मंदिर समिति द्वारा इस अनुष्ठान के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश भी दिया जा रहा है। गणेश प्रतिमा विसर्जन के उपरांत बची हुई पवित्र रज से तैयार किए गए 108 गमलों में सौभाग्य के प्रतीक ‘जेड प्लांट’ लगाए जाएंगे। वातावरण को शुद्ध करने और मानसिक तनाव दूर करने वाले इन 108 जेड प्लांट का निशुल्क वितरण नवरात्रा चतुर्थी, 14 अक्टूबर को प्रातः 10 बजे से मंदिर परिसर में पंजीकृत विद्यार्थियों को किया जाएगा। इस प्रकार गणेश विसर्जन के बाद बची पवित्र रज से तैयार पौधों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी पहुंचाया जाएगा।