कोटा में गणधर मुनि विवर्धनसागर जी का भव्य चातुर्मास प्रारंभ, ‘यह पूरे शहर का चातुर्मास है’ संदेश से गूंजा धर्मसभा परिसर
कोटा के कुन्हाड़ी स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में गणधर मुनि विवर्धनसागर जी के चातुर्मास की भव्य स्थापना हुई। जानिए मंगल कलश महोत्सव और देशना की प्रमुख बातें।
कोटा के चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर प्रांगण में ध्वजारोहण और चातुर्मास स्थापना पूजन में भाग लेते मुनिसंघ तथा श्रद्धालु।
कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत शुक्रवार को गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) के भव्य चातुर्मासिक मंगल कलश महोत्सव के साथ चातुर्मास की विधिवत स्थापना हुई। चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण, स्वागत गान, पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट तथा मुनिसंघ द्वारा चातुर्मास स्थापना विधि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज की मंगल देशना, शास्त्र भेंट, पादप्रक्षालन और जिनवाणी स्तुति का आयोजन किया गया।
अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं महामंत्री पंकज खटोड ने बताया कि चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, पादप्रक्षालन एवं ध्वजारोहण का सौभाग्य मनोज-नेहा जैसवाल तथा आशीष-रोजी जैसवाल परिवार को प्राप्त हुआ। मुख्य प्रथम कलश के पुण्यार्जक संजय बांझल, रोहित लांबाबास परिवार एवं आदित्य ग्रुप, आर.के. पुरम रहे। चार माह तक लगने वाले महाराजश्री के चौके की सामग्री के पुण्यार्जक महेंद्र, प्रवेश, रजत बगड़ा परिवार तथा मौसम त्रिपाल परिवार रहे।
इस अवसर पर विरागोदय तीर्थ एवं श्रेयांशगिरी तीर्थ के नाम से दो विशेष कलश भी स्थापित किए गए। पूरे चातुर्मास के दौरान मुख्य कलश सहित कुल 226 कलशों की स्थापना की जाएगी।
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला ने बताया कि गुरु भक्ति से सराबोर वातावरण में श्रावक-श्राविकाओं ने भक्ति गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। महिला मंडल, बालिका महिला मंडल एवं रिद्धि-सिद्धि महिला मंडल ने गुरुपूजन के दौरान अक्षत, पुष्प, दीप एवं अर्घ्य समर्पण की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। चंद्रप्रभु नवयुवक मंडल, गुरु सेवा संघ तथा बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
धर्मसभा में शामिल होने के लिए कर्नाटक, भोपाल, ग्वालियर, जयपुर, उज्जैन, पथरिया, आगरा और पिडावा सहित कई क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु कोटा पहुंचे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने कहा कि श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से किए गए कार्य सदैव सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल जैन धर्म ही नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का साधना पर्व है। यह आत्मचिंतन, संयम और धर्म साधना का सर्वोत्तम अवसर है। उन्होंने कहा, “यह केवल कुन्हाड़ी का नहीं, बल्कि पूरे कोटा का चातुर्मास है। प्रत्येक व्यक्ति यहां आकर धर्मलाभ प्राप्त कर सकता है।”
मुनि श्री ने महाभारत के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब युधिष्ठिर को नगर में किसी बुरे व्यक्ति की खोज करने और दुर्योधन को किसी अच्छे व्यक्ति की तलाश करने भेजा गया, तब दोनों खाली हाथ लौटे। दुर्योधन ने कहा कि उसे पूरे नगर में कोई अच्छा व्यक्ति नहीं मिला, जबकि युधिष्ठिर ने बताया कि उन्हें कोई बुरा व्यक्ति दिखाई नहीं दिया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि संसार हमें वैसा ही दिखाई देता है, जैसा हमारा दृष्टिकोण होता है। व्यक्ति की सोच और संस्कार ही उसके देखने-समझने का नजरिया तय करते हैं। सकारात्मक दृष्टि अपनाने से हर व्यक्ति और परिस्थिति में अच्छाई दिखाई देने लगती है।
सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज ने कहा कि जहां गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह भूमि स्वतः पावन हो जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सामूहिक सहयोग और श्रद्धा से यह चातुर्मास ऐतिहासिक बनेगा।
कार्यक्रम का संचालन पारस बज आदित्य ने किया। इस अवसर पर समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, विमल जैन टोरड़ी, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, महामंत्री पदम बड़ला, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला सहित मनोज जैसवाल, पारस सोगानी, मनोज आदिनाथ, नरेश वेद, अनिल ठौरा, प्रकाश मेहरूवाला, ईश्वर सोनी, रितेश सेठी, निर्मल अजमेरा, पदम बनेठा, स्वतंत्र पाटनी, पारस लुहाड़िया, संजय लुहाड़िया, मनोज निर्खी, सुरेश देईवाले, चंद्रप्रकाश बंसल, राजकुमार पाटनी, विनोद सारसोप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक उल्लास, श्रद्धा और व्यापक जनसहभागिता के साथ प्रारंभ हुआ यह चातुर्मास आगामी चार माह तक विविध धार्मिक आयोजनों का केंद्र रहेगा।