तस्वीर में रोटरी बीनानी सभागार में विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन कार्यक्रम के दौरान अतिथि और विशेषज्ञ प्रमाण पत्र दिखाते हुए नजर आ रहे हैं।

विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्तनपान को शिशु के सर्वांगीण विकास, कुपोषण की रोकथाम और स्वस्थ समाज के निर्माण का सबसे प्रभावी आधार बताया। रोटरी क्लब कोटा, बीपीएनआई एवं भारतीय शिशु अकादमी सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में रोटरी बीनानी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने स्तनपान के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि माँ का दूध ही शिशु का पहला टीकाकरण है। उन्होंने जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने और जीवन के पहले छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि में शिशु को पानी तक नहीं दिया जाना चाहिए तथा दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए।

अपने स्वागत संबोधन में रोटरी क्लब कोटा के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह खींची ने कहा कि माँ का दूध नवजात शिशु के लिए अमृत के समान है। यह शिशु को संपूर्ण पोषण प्रदान करने के साथ-साथ माँ और शिशु के बीच अटूट स्नेह एवं आत्मीयता का बंधन भी स्थापित करता है।

कार्यक्रम में एमबीएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. राकेश सिंह एवं संयुक्त निदेशक जगदीश सोनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सहसंयोजक यज्ञदत्त हाड़ा एवं डॉ. एकात्म गुप्ता ने बताया कि सप्ताह भर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से समाज तक स्तनपान के महत्व का संदेश पहुँचाया गया।

डॉ. नीलेश जैन ने आगे कहा कि माँ का प्रथम दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए अमृत के समान होता है, जिसमें आवश्यक पोषक तत्व एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता भरपूर मात्रा में होती है। उन्होंने कहा कि स्तनपान न केवल शिशु के शारीरिक बल्कि मानसिक एवं बौद्धिक विकास में भी सहायक है, साथ ही यह माँ और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी सुदृढ़ करता है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. सीबी दास गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में अनेक कारणों से माताओं को स्तनपान से दूर किया जा रहा है, जबकि वैज्ञानिक शोध यह सिद्ध करते हैं कि स्तनपान से बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है और भविष्य में मधुमेह, कैंसर, मोटापा एवं कुपोषण जैसी बीमारियों का जोखिम कम होता है। उन्होंने कहा कि बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच स्तनपान एक सशक्त एवं प्राकृतिक समाधान है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्तनपान को केवल माँ तक सीमित न रखते हुए पूरे परिवार की जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि विश्व स्तनपान सप्ताह केवल एक सप्ताह का अभियान न रहकर जन-जन का संकल्प बने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न संस्थाओं, क्लबों एवं प्रतिभागी बच्चों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर क्लब लर्निंग फेलिसिटेटर मुकेश व्यास, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ तथा नर्सिंग छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन यज्ञदत्त हाड़ा ने किया, जबकि रोटरी क्लब कोटा के सचिव मुकेश चौधरी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन पर विशेषज्ञों ने मातृ दुग्ध के महत्व को व्यापक जनजागरूकता से जोड़ते हुए इसे स्वस्थ पीढ़ी और स्वस्थ समाज की आधारशिला बताया।

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