कागल के बानगे में गन्ने के दाम और गोकुल विवाद पर सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते किसान।

कोल्हापुर जिले के कागल तालुका के बानगे गांव में गन्ने का प्रति टन ₹4,500 मूल्य घोषित करने और गोकुल दूध संघ के चेयरमैन चयन में शासन द्वारा नियुक्त संचालकों के फैसले को रद्द करने की मांग को लेकर किसानों और सर्वदलीय कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। शासन के कथित हस्तक्षेप और किसानों की मांगों की अनदेखी के विरोध में महाराष्ट्र सरकार का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर तीखा विरोध दर्ज कराया गया। आंदोलन में बानगे पंचक्रोशी के बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

यह विरोध प्रदर्शन सर्वदलीय कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा गन्ना और दुग्ध उत्पादक किसानों की ओर से आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि गन्ने का प्रति टन ₹4,500 मूल्य घोषित किया जाए और गोकुल दूध संघ के चेयरमैन चयन के मामले में शासन द्वारा लिया गया निर्णय रद्द किया जाए।

इस दौरान वसंत धनगर ने आरोप लगाया कि मंत्री पुत्रप्रेम में अंधे हो गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता ने धर्म और जाति को देखे बिना जिन नेताओं को चुनकर भेजा है, उन्हें लोकनेता मंडलिक साहब के विचारों के अनुरूप आचरण करना चाहिए।

रमेश सावंत ने कहा कि पिछले दो महीने से गन्ना मूल्य को लेकर आंदोलन जारी है और किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी का मुद्दा भी लंबित है। इन समस्याओं पर अध्यादेश जारी करने का समय नहीं निकाल पाने वाली सरकार को गोकुल में चेयरमैन नियुक्त करने के लिए अध्यादेश लाने की जल्दी कैसे हो गई? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गन्ना मूल्य का मुद्दा नहीं सुलझाया गया तो किसान सरकार को दिवाली नहीं मनाने देंगे।

किसान संगठन के शिवाजी पाटील-शेलार ने गन्ना मूल्य और गोकुल चेयरमैन पद को लेकर उचित निर्णय होने तक पालकमंत्री और मंत्रियों के गांवों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया।

सौ. वनिता विनायक पाटील ने कहा कि गन्ना और दुग्ध उत्पादक किसान दिन-रात मेहनत करके अपना परिवार चलाते हैं, लेकिन शासन की नीतियां उनके सुखी जीवन में बाधा बन रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को रास्ते पर लाने के लिए महिलाएं भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन को और तेज करेंगी। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी तरीके से कानून बदलने वाले नेताओं को कागल की जनता भविष्य में निर्वाचित नहीं करेगी।

संजय सुतार ने आरोप लगाया कि महायुति के नेताओं की गोकुल दूध संघ को गुजरात के सूरत ले जाने की साजिश है। उन्होंने कहा कि किसानों की लूट करने वाली सरकार को वर्ष 2029 में जनता सबक सिखाएगी।

समापन अवसर पर शेखर सावंत ने गोकुल चेयरमैन चयन को लेकर शासन के फैसले और गन्ना मूल्य घोषित करने में दिखाई जा रही उदासीनता की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गोकुल का लाभांश, किसानों की कर्जमाफी और उचित गन्ना मूल्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं, तब शासन को गोकुल में राजनीति करने के लिए तत्काल अध्यादेश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

इस अवसर पर कांग्रेस के तालुका अध्यक्ष एड. दयानंद नानासाहेब पाटील-नंद्याळकर ने कहा कि किसान नेता राजू शेट्टी और जिले के नेता सतेज पाटील के नेतृत्व में गन्ना एवं दुग्ध उत्पादकों की समस्याओं को लेकर जारी संघर्ष को बानगे गांव का हमेशा समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने इस आंदोलन को सहयोग देने वाले बानगे के लोगों का आभार व्यक्त किया।

प्रदर्शन में कॉ. शेखर सावंत, रमेश सावंत, एड. दयानंद पाटील-नंद्याळकर, वसंत धनगर, शिवाजी पाटील, सौ. वनिता पाटील, संजय सुतार, विनायक पाटील और प्रकाश सावंत के साथ सुरेश गुरव, अमर यादव, अमर चौगुले, बाळासो बोंगार्डे, नेताजी पाटील, तुकाराम सावंत, मदन पाटील, तानाजी पाटील, धनाजी पाटील, निवृत्ती बंदुके, गुंडराम लंबे, सुनील बोंगार्डे, युवराज पाटील, राजेंद्र जिरगे, पप्पू जिरगे और बी. एन. पाटील उपस्थित रहे। इनके अलावा हनुमान दूध संस्था के सदस्य तथा बानगे पंचक्रोशी के सैकड़ों गन्ना और दुग्ध उत्पादक किसान भी आंदोलन में शामिल हुए।

गन्ने के उचित मूल्य, किसानों की कर्जमाफी और गोकुल दूध संघ के चेयरमैन चयन को लेकर उठे विवाद ने बानगे में शासन के खिलाफ किसानों और सर्वदलीय कार्यकर्ताओं के विरोध को एकजुट कर दिया है।

Tags: