झालावाड़ जिले की हिम्मतगढ़ ग्राम पंचायत स्थित श्मशान घाट परिसर, जहां विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने और राशि के सीधे सरपंच के खाते में ट्रांसफर होने के आरोप लगे हैं।

राजस्थान के झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायत हिम्मतगढ़ में विकास कार्यों और सरकारी धन के भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। श्मशान घाट के निर्माण और इंटरलॉकिंग कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दर्शाए जाने के बावजूद मौके पर काम की स्थिति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, हैंडपंप, स्वच्छता योजना, पुलिया और नाला निर्माण से जुड़े कई भुगतानों में सरपंच लीला बाई के निजी बैंक खाते में सीधे राशि हस्तांतरित किए जाने का दावा किया गया है।

श्मशान घाट के विकास पर 19 लाख रुपये खर्च दर्शाए जाने के मामले में निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति और भुगतान की राशि के बीच अंतर होने के आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2021-2022 में मॉडल श्मशान निर्माण के नाम पर मनरेगा योजना से 12 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि वहां पहले से टीनशेड मौजूद होने की बात कही गई है।

इसके बाद उसी श्मशान घाट में नरेगा योजना के तहत इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 3 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसी स्थान पर विधायक कोष से भी इंटरलॉकिंग कार्य के लिए 4 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए। इस तरह इंटरलॉकिंग के नाम पर कुल 7 लाख रुपये के भुगतान का उल्लेख है। आरोप है कि मौके पर मुश्किल से 1 से 1.5 लाख रुपये का निर्माण कार्य हुआ है और बिछाई गई इंटरलॉकिंग भी मिट्टी में धंस चुकी है।

विवरण के मुताबिक, वर्ष 2020-21 के बाद श्मशान घाट के विकास पर कुल 19 लाख रुपये खर्च दर्शाए गए, जबकि मौके पर लगभग 5-6 लाख रुपये का ही काम दिखाई देने का दावा किया गया है। इस आधार पर शेष 13-14 लाख रुपये के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच या प्रशासनिक पुष्टि के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

ग्राम पंचायत हिम्मतगढ़ में ग्राम विकास अधिकारी दीपक कुमार मीणा और सरपंच लीला बाई की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वित्तीय नियमों की अनदेखी करते हुए विभिन्न विकास कार्यों की राशि सीधे सरपंच के निजी बैंक खाते में हस्तांतरित की गई। इसके समर्थन में सरकारी वाउचर का हवाला दिया गया है।

बलड़ा के बालाजी के पास हैंडपंप निर्माण के लिए 20 जून 2025/2026 को 24,100 रुपये का भुगतान सीधे सरपंच लीला बाई के बैंक खाते में किए जाने का उल्लेख है। इसी तरह देवनारायण मंदिर के पास हैंडपंप निर्माण के नाम पर 22,670 रुपये भी सरपंच के निजी खाते में हस्तांतरित किए जाने का दावा किया गया है।

स्वच्छता से जुड़े भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर से संबंधित साफ-सफाई के नियमों और टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए बताया गया है कि एसबीएम (SBM) योजना के तहत 65,700 रुपये का भुगतान किसी फर्म या एजेंसी के बजाय सीधे सरपंच लीला बाई के खाते में किया गया। इस भुगतान के लिए वाउचर नंबर p2 और तारीख 3 जून 2026 का उल्लेख किया गया है।

पुलिया और नाला निर्माण से जुड़ा भुगतान भी सवालों के घेरे में है। विवरण के अनुसार, 5 अप्रैल 2025 को पुलिया निर्माण के नाम पर 2,51,650 रुपये की राशि सीधे सरपंच के निजी बैंक खाते में हस्तांतरित की गई। इन भुगतानों को लेकर यह सवाल उठाया गया है कि पंचायत के विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान निजी खाते में किस आधार पर किया गया और संबंधित वित्तीय प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।

मामले में झालावाड़ जिला परिषद के बड़े अधिकारियों की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अधिकारियों की कथित मिलीभगत या छूट के कारण पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला जारी रहा। एक ओर ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करने का दावा किया गया है, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों पर खर्च की गई राशि और मौके पर मौजूद निर्माण के बीच अंतर होने के आरोप सामने आए हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग दोबारा पद हासिल करने की तैयारी में हैं।

हिम्मतगढ़ पंचायत में श्मशान घाट के विकास, इंटरलॉकिंग, हैंडपंप, स्वच्छता योजना और पुलिया निर्माण से जुड़े भुगतानों की निष्पक्ष जांच से ही खर्च की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब जिला प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है और सरकारी धन के उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच होती है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल, उपलब्ध विवरण में किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।

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