दुनिया जीतने नहीं, जोड़ने की बात करता है भारत, यही मंत्र बनाएगा विश्व गुरु : दिया कुमारी
जयपुर में विशाल भारत पर व्याख्यान में दिया कुमारी ने भारत के विश्व गुरु बनने का मंत्र बताया, वहीं सामरिक आत्मनिर्भरता पर भी मंथन हुआ।
तस्वीर में जयपुर के अग्रवाल कॉलेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करतीं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और मंच पर बैठे अन्य अतिथि नजर आ रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के जयपुर चैप्टर की ओर से शुक्रवार को महाराजा अग्रसेन सभागार, अग्रवाल कॉलेज में ‘विशाल भारत : आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारत की आर्थिक सामर्थ्य, सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक आत्मनिर्भरता पर मंथन हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी रहीं। मंच के जयपुर चैप्टर अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज हर क्षेत्र में प्रगति और उन्नति कर रहा है। वर्ष 2047 तक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को पूरा करने में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा, “दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत भी इस बदलाव के साथ आगे बढ़ रहा है। हम दुनिया जीतने की नहीं, दुनिया को जोड़ने की बात करते हैं। यही मंत्र आगे चलकर भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करेगा।”
दिया कुमारी ने कहा कि 140 करोड़ व्यक्तियों की सामूहिक शक्ति का नाम भारत है। विद्यार्थियों से उन्होंने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी के साथ लिखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही वर्ष 2047 में देश का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत खेल, शिक्षा और अंतरिक्ष सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “देश की बुराई करने के बजाय देश के साथ खड़े हों और भारत की प्रगति में अपना योगदान दें।”
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एकात्म मानव दर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने अफगानिस्तान के गंधार से लेकर म्यांमार के बर्मा तक हिमालय के नीचे फैले विशाल भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अवधारणा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि हमें समझना होगा कि अफगान, बर्मा, पंजाब और सिंध आज भारत का हिस्सा क्यों नहीं हैं। इसके पीछे केवल राजनीतिक सीमाएं ही नहीं, बल्कि संस्कृति के कमजोर होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रही है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति आज भी जीवंत और सजीव है। हिंदू संस्कृति और भारतीय संस्कृति को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता। हिंदू को केवल एक संप्रदाय मानना भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा को सीमित करना है।
अर्थव्यवस्था के संदर्भ में डॉ. शर्मा ने वर्तमान वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज बड़ी मात्रा में धन सुरक्षा, शेयर बाजार, रियल एस्टेट और करेंसी ट्रेडिंग जैसे क्षेत्रों में जा रहा है। अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण और उपभोग के साथ जनकल्याण की भावना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज कई परिवारों में भोजन से अधिक खर्च दवाइयों पर हो रहा है, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।
उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा घरों में दिखाई देता है। महिलाएं परिवार संभालती हैं, बच्चों का पालन-पोषण करती हैं और घर की पूरी व्यवस्था चलाती हैं। उनके इस योगदान को केवल पैसों में नहीं आंका जा सकता।
डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत भूमि रत्नगर्भा है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां जल, पर्वत, खनिज और लवण सहित प्रकृति की अपार संपदा है। उन्होंने भारत की संरचना को पांच महाभूतों से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति ने भारत को विशिष्ट सामर्थ्य प्रदान की है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि भारत को शस्त्र निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने कहा, “हमारी दसों भुजाएं हमारी अपनी होनी चाहिए। मांगी हुई भुजाओं से युद्ध नहीं लड़े जाते।” उन्होंने कहा कि भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में जो संकल्प लिया है, वह महत्वपूर्ण कदम है।
व्याख्यान को लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने भी संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की सैन्य व्यवस्था और सामरिक चुनौतियों पर विचार रखते हुए कहा कि आज के विश्व में युद्ध स्थायी और शांति अस्थायी होती जा रही है। ऐसे वातावरण में भारत को सामरिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनना होगा।
आंतरिक सुरक्षा का उल्लेख करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल पी.एस. शेखावत ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए तैयार रहना चाहिए। राष्ट्रप्रेमी और सभ्य नागरिक ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सरदार जसवीर सिंह ने विशाल भारत के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मंच भारत के वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक रूप से भारत को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक संकल्प की आवश्यकता बताई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र संचालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में भारत की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत की आधारभूत शक्ति उसका सनातन धर्म है। धर्म का अर्थ केवल किसी मजहब या संप्रदाय से नहीं, बल्कि उस आचरण से है जो व्यक्ति को अपने कर्तव्यों और मानवीय व्यवहार का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा कि विश्व के रंगमंच पर भारत का विशिष्ट स्थान है और 21वीं सदी भारत की सदी है। भारत वसुधैव कुटुंबकम की भावना में विश्वास रखता है। कोरोना काल में भारत ने 100 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय चेतना का जागरण हो रहा है और गुलामी के प्रतीकों को हटाकर भारतीय गौरव को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति की मूलभूत विशेषताओं के कारण ही भारत अपनी पहचान बनाए हुए है और यही संस्कृति भविष्य में भारत को विश्व नेतृत्व की दिशा में ले जाएगी।
इससे पहले मंच के जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. एस.एस. अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बनता, बल्कि भूमि, संस्कृति और सुरक्षा उसके महत्वपूर्ण आयाम हैं। विशाल भारत की अवधारणा को समझे बिना सुरक्षा से जुड़े प्रभावी उपायों को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। इसी उद्देश्य से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में इस व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मंच के जयपुर चैप्टर के महासचिव पुष्कर उपाध्याय ने अतिथियों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन प्रो. मीना रानी ने किया। कार्यक्रम में ले. ज. अनुज माथुर, राजन सिंह, पूर्व कुलपति भगीरथ जी चौधरी, अनिरुद्ध सिंह, सुश्री नर्बदा इंदौरिया, झामन टेकचंदानी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। व्याख्यान में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और सामरिक दृष्टिकोण से भारत की सामर्थ्य तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर व्यापक मंथन हुआ।