मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने टोंक जिले के दौरे के दौरान जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जल संचय-जन भागीदारी अभियान, ईसरदा बांध और पीएचईडी प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा करने के बाद साइबर पुलिस थाने का निरीक्षण किया।   

जयपुर/टोंक, 8 अक्टूबर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को टोंक दौरे के दौरान जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में जल संचय-जन भागीदारी अभियान, ईसरदा बांध और पीएचईडी प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में जल संरक्षण कार्यों में जनभागीदारी, ईसरदा बांध निर्माण एवं पेयजल वितरण तथा पीएचईडी विभाग के प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को कार्यों में गति लाने और निर्धारित प्राथमिकताओं के अनुसार प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जल संचय-जन भागीदारी अभियान के तहत कराए जा रहे कार्यों में आमजन, भामाशाह और जल उपयोगकर्ता संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल चौपाल जैसे कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण संरचनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर संबंधित विभागों के साथ अभियान की नियमित समीक्षा करें और जल संरक्षण के तहत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी करें।

श्री वी. श्रीनिवास ने अभियान के तहत टोंक जिले में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, स्वायत्त शासन, वाटरशेड, भूजल और वन विभाग द्वारा कराए जा रहे जल संचय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्य पूर्ण हो चुके हैं, वहां जल अर्पण कार्यक्रम आयोजित कर पेयजल परियोजनाओं को हस्तांतरित करने का कार्य किया जाए।

बैठक में प्रदेश के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ईसरदा बांध के निर्माण कार्य, पेयजल वितरण की प्रगति और पीएचईडी प्रोजेक्ट्स की पूर्णता को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने ईसरदा बांध निर्माण के लिए भूमि अवाप्ति की स्थिति की भी विस्तार से जानकारी ली और इस संबंध में अधिकारियों से चर्चा की।

समीक्षा बैठक के दौरान संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड, जिला कलेक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक रोशन मीना, एडीएम विनोद कुमार मीना, सीईओ राकेश कुमार मीना, मुख्य अभियंता (पीएचईडी) राजसिंह, अधीक्षण अभियंता ईसरदा बांध जितेन्द्र लुहाड़िया समेत जल संसाधन, पीएचईडी, स्वायत्त शासन, वाटरशेड, कृषि और वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

इसके बाद मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने साइबर पुलिस थाना टोंक का निरीक्षण किया और साइबर क्राइम पर प्रभावी नियंत्रण तथा पीड़ितों को त्वरित राहत देने के लिए अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीड़ित से शिकायत मिलते ही पुलिस, बैंकिंग संस्थाओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय स्थापित कर ठगी की राशि को सुरक्षित कराने की कार्रवाई शुरू होनी चाहिए।

मुख्य सचिव ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत प्राप्त होने से लेकर उसके पंजीकरण, एफआईआर, साक्ष्यों के संकलन, जांच प्रक्रिया और प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने साइबर अपराधों के प्रभावी निस्तारण के लिए कार्मिकों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।

उन्होंने म्यूल अकाउंट की पहचान करने, संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज या सीज करने तथा साइबर ठगी में दर्ज एफआईआर के लंबित चालान नियत समयावधि में पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही आमजन को साइबर क्राइम की धोखाधड़ी से बचाने के लिए बड़े स्तर पर जन जागरूकता कैंपेन चलाने पर भी जोर दिया।

साइबर थाना निरीक्षण के दौरान संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह राठौड, जिला कलेक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक रोशन मीना, एडीएम विनोद कुमार मीना, एएसपी रतन लाल भार्गव, सीईओ राकेश कुमार मीना समेत अन्य प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव के दौरे में जल संरक्षण से लेकर पेयजल परियोजनाओं और साइबर अपराधों के निस्तारण तक प्रशासनिक एवं पुलिस स्तर पर चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

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