तस्वीर में गांधी अध्ययन केंद्र के बाहर लोग एक साथ खड़े होकर पोज दे रहे हैं।

राजस्थान विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययन केंद्र में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को गांधीजी की 157वीं जयंती के अवसर पर ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी की प्रासंगिकता’ कार्यक्रम आयोजित कर गांधीजी को श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के राजनीति विज्ञान विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. मंजु शर्मा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मंजु शर्मा ने वर्तमान समय की परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए गांधी के बताए सादगी के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. गीता चतुर्वेदी ने ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी की प्रासंगिकता’ विषय पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की वर्तमान परिस्थितियों में गांधी सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। वे सत्य एवं अहिंसा पर आधारित जीवन जीने पर बल देते थे।

गांधी अध्ययन केन्द्र की निदेशक डॉ. हंसा चौधरी ने गांधीजी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और वर्तमान समय में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता स्पष्ट की। राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अंशु वर्मा के निर्देशन में विभाग के विद्यार्थियों ने गांधीजी के प्रिय भजनों की मनमोहक प्रस्तुती दी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकगण, अशैक्षणिक कर्मचारी, अन्य महाविद्यालयों के शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रोफेसर पी.सी. माली, प्रोफेसर मंजू शर्मा, प्रो. सुनीता शर्मा, प्रो. मधु मुकुल चतुर्वेदी, डॉ. इंद्रा चतुर्वेदी, डॉ दीपक यादव, डॉ. नेहा भारतीया, डॉ. नीलम पुनार, डॉ. पूनम, डॉ. डॉ आशुराज आनंद, डॉ. उम्मेद सिंह, डॉ. राजश्री स्वामी, डी. राम प्रकाश भारी, नमोनारायण मीणा, गौरव शर्मा सहित विभिन्न विभागों के आए अनेक शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन श्रवण कुमार एवं रिया जाखड़ ने किया। अंत में कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनिल अनिकेत ने उपस्थित सभी आगन्तुकों को धन्यवाद ज्ञापित किया। गांधी अध्ययन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में गांधीजी के विचारों और सत्य-अहिंसा आधारित जीवन दृष्टि को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताया गया।

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