राजस्थान समान नागरिक संहिता पर 10-11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई, आमजन से मांगे जाएंगे सुझाव

जयपुर में 10 और 11 जुलाई को राजस्थान समान नागरिक संहिता पर जनसुनवाई होगी। आमजन ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से सुझाव देकर नीति निर्माण में भागीदारी कर सकेंगे।

Update: 2026-07-08 13:19 GMT

राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान समान नागरिक संहिता के संबंध में आमजन के सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से 10 एवं 11 जुलाई 2026 को जयपुर में दो दिवसीय संभाग स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन जिला कलक्टर सभागार, जयपुर में किया जाएगा। इस जनसुनवाई के माध्यम से विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से सुझाव लेकर नीति निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

राजस्थान समान नागरिकता संहिता 2026 समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह होंगे। समिति में संभागीय आयुक्त जयपुर समन्वयक के रूप में, गृह विभाग के प्रतिनिधि, जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट जयपुर, उप विधि परामर्शी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। इसके साथ ही अतिरिक्त जिला कलक्टर दूदू, उपखण्ड अधिकारी जयपुर प्रथम, सहायक कलक्टर दूदू फास्ट ट्रेक, सहायक कलक्टर चौमू, सहायक कलक्टर चौमू फास्ट ट्रैक, सहायक कलक्टर शाहपुरा फास्ट ट्रैक, सहायक कलक्टर जमवारामगढ़ फास्ट ट्रैक, सहायक कलक्टर आमेर, सहायक कलक्टर आमेर फास्ट ट्रैक, उपनिदेशक महिला अधिकारिता जयपुर, जिला कलक्टर द्वारा नामित 10 विज्ञ अधिकारी तथा समस्त तहसीलदार एवं सहयोगी स्टाफ जयपुर सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।

10 जुलाई को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, नगर निकायों के अध्यक्षों, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत संगठनों, प्रबुद्धजनों तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक जयपुर संभाग के विभिन्न जिलों से आए आम नागरिकों के साथ जनसुनवाई आयोजित होगी। इस जनसुनवाई की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह करेंगे।

11 जुलाई को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक जयपुर जिले के नागरिकों की शेष जनसुनवाई राजस्थान समान नागरिकता संहिता 2026 समिति की सदस्य डॉ. शुचि चौहान द्वारा आयोजित की जाएगी।

संभागीय आयुक्त वे. सरवण कुमार ने जिला कलक्टर जयपुर को जनसुनवाई के सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित जनप्रतिनिधियों, संस्थाओं और अन्य हितधारकों को आमंत्रित कर व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है।

राजस्थान सरकार ने सुझाव देने के लिए https://ucc.rajasthan.gov.in पोर्टल भी शुरू किया है। नागरिक व्यक्तिगत रूप से अथवा किसी संस्था एवं संगठन की ओर से भी अपने सुझाव दे सकते हैं। सर्वे में 19 प्रश्नों के उत्तर हां या ना में देने होंगे। इसके अलावा नागरिक अपने विस्तृत सुझाव और संबंधित दस्तावेज भी अपलोड कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाएगी।

जनसुनवाई और ऑनलाइन सर्वे के दौरान नागरिकों से पूछा जाएगा कि क्या वे संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं, क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं, क्या यूसीसी संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू की जा सकती है, क्या विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल किया जाए, क्या सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम होने चाहिए, क्या तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए, क्या भरण-पोषण के लिए एक समान कानून बनाया जाए, क्या महिलाओं और पुरुषों को समान संपत्ति अधिकार मिलने चाहिए, क्या लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए, क्या लिव-इन संबंधों से जुड़ी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को कानून में शामिल किया जाना चाहिए, क्या बहुविवाह महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करता है तथा क्या यूसीसी से सामाजिक कुरीतियों और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने में मदद मिलेगी।

गृह विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने सुझाव देकर नीति निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार बनें। विभाग का मानना है कि व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार होने वाला मसौदा अधिक व्यावहारिक और सर्वसमावेशी होगा।

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