तस्वीर में राजस्थान पुलिस की साइबर एडवाइजरी का आधिकारिक लोगो दिखाई दे रहा है, जिस पर 'राजस्थान पुलिस की साइबर एडवाइजरी' और हेल्पलाइन नंबर 'डायल 1930' अंकित है। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।

जयपुर, 1 सितंबर। पोर्नोग्राफिक ऐप्स के जरिए मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर साइबर ठगी करने वाले अपराधियों को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी इस एडवाइजरी में सोशल मीडिया पर प्रसारित अश्लील विज्ञापनों और लिंक के जरिए फर्जी वेबसाइटों तक पहुंचाकर संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड करवाने के तरीके से सावधान किया गया है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी “Night Play”, “Reloop”, “Kyss”, “Vimo”, “Rivo”, “Nexo”, “Vixa” जैसे नामों तथा इसी तरह के अन्य नामों से सोशल मीडिया पर विज्ञापन प्रसारित कर रहे हैं। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को अश्लील वेबसाइटों पर ले जाया जाता है और वहां से संदिग्ध एपीके डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इस साइबर ठगी की शुरुआत टेलीग्राम, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील विज्ञापनों या लिंक के प्रसार से होती है। लिंक पर क्लिक करने वाले उपयोगकर्ता को फिशिंग वेबसाइट पर पहुंचाकर अज्ञात स्रोत से एपीके फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए उकसाया जाता है।

ऐप इंस्टॉल होने के बाद ‘ऐप अपडेट’ के नाम पर दूसरा पैकेज भी डाउनलोड और इंस्टॉल कराया जा सकता है। इसके बाद संदिग्ध ऐप उपयोगकर्ता से एक्सेसिबिलिटी (Accessibility) सहित अन्य संवेदनशील परमिशन मांगता है। अनुमति मिलते ही ऐप मोबाइल में वायरस सक्रिय कर डिवाइस का नियंत्रण हासिल कर सकता है और बैकग्राउंड में काम करता रहता है।

राजस्थान पुलिस के अनुसार, कुछ संदिग्ध ऐप मोबाइल फोन में वीपीएन भी इंस्टॉल कर देते हैं। इसके जरिए मोबाइल का इंटरनेट ट्रैफिक साइबर अपराधियों के सर्वर से संचालित हो सकता है। डिवाइस का नियंत्रण अपराधियों के हाथ में जाने के बाद वे उपयोगकर्ता के बैंक खाते और अन्य वित्तीय संसाधनों से अनधिकृत लेनदेन कर सकते हैं। कुछ संदिग्ध ऐप उपयोगकर्ता को उन्हें सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल करने से भी रोक सकते हैं।

पुलिस ने आमजन से सोशल मीडिया विज्ञापनों, संदिग्ध वेबसाइटों और अज्ञात लिंक से एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करने की अपील की है। अनजान ऐप्स को एक्सेसिबिलिटी परमिशन नहीं देने, एप्लिकेशन केवल गूगल प्ले स्टोर या अन्य विश्वसनीय ऐप स्टोर से डाउनलोड करने और मोबाइल में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी गई है। किसी अनजान ऐप को तुरंत हटाने के साथ गूगल प्ले प्रोटेक्ट चालू रखने और मोबाइल डिवाइस को अपडेटेड रखने को भी कहा गया है। साथ ही बैंक खाते और यूपीआई ट्रांजैक्शंस पर नियमित रूप से नजर रखने की सलाह दी गई है।

यदि कोई संदिग्ध ऐप सामान्य तरीके से अनइंस्टॉल नहीं हो रहा है तो पुलिस ने फोन को सेफ मोड में शुरू करने की सलाह दी है। इसके लिए पावर ऑफ विकल्प को तब तक दबाकर रखना होगा, जब तक सेफ मोड का विकल्प दिखाई न दे। इसके बाद ओके अथवा रीस्टार्ट इन सेफ मोड पर क्लिक करना होगा। फोन के Safe Mode में शुरू होने के बाद Settings > Apps में जाकर संदिग्ध ऐप को चुनकर Uninstall किया जा सकता है। ऐप हटाने के बाद फोन को सामान्य रूप से Restart करने पर Safe Mode अपने आप हट जाएगा।

राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगी की घटना होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचना देने को कहा है। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर हेल्पडेस्क के नंबर 9256001930 एवं 9257510100 पर सूचना दी जा सकती है। पुलिस की एडवाइजरी का उद्देश्य संदिग्ध एपीके, संवेदनशील परमिशन और वीपीएन के जरिए मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर की जा रही साइबर ठगी से लोगों को समय रहते सतर्क करना है।

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