तस्वीर में जयपुर के द ललित होटल में आयोजित चौथे राजस्थान मिलेट एंड मस्टर्ड कॉन्क्लेव 2026 के दौरान मंच पर रिपोर्ट का विमोचन करते हुए (बाएं से दाएं) अतुल शर्मा, हेमा यादव, मंजू राजपाल, सुरभि राणा और अक्षय हाडा नजर आ रहे हैं.   

जयपुर, 18 सितंबर 2026। राजस्थान की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए सरकार, उद्योग, शोध संस्थानों और किसानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और बाजार से जोड़कर कृषि क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने की बात शुक्रवार को द ललित, जयपुर में आयोजित चौथे राजस्थान मिलेट एंड मस्टर्ड कॉन्क्लेव-2026 में सामने आई।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की ओर से आयोजित कॉन्क्लेव की थीम “रेसिलिएंट क्रॉप्स विद इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज” रही। इसमें सरसों और मिलेट की उत्पादकता बढ़ाने के साथ मजबूत मूल्य श्रृंखला, प्रसंस्करण, बेहतर बाजार संपर्क और किसानों को अधिक प्रतिफल उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, FPOs, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।

कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव, राजस्थान सरकार, श्रीमती मंजू राजपाल, IAS ने कहा, “राजस्थान के कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। बदलती जलवायु और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए आधुनिक तकनीक, बेहतर अनुसंधान और नवाचार को प्रभावी रूप से किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है। सरकार, कृषि वैज्ञानिकों, उद्योग, स्टार्टअप्स, FPOs और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी से उत्पादकता बढ़ाने के साथ कृषि उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। राजस्थान सरकार एग्रो-प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 की घोषणा की गई है और 39 स्थानों की पहचान भी की जा चुकी है। हमारा प्रयास है कि तकनीक का लाभ खेत और किसान तक पहुंचे तथा इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय और समृद्धि पर दिखाई दे।”

कृषि आयुक्त, राजस्थान सरकार, श्रीमती सुरभि राणा, साउथ एशिया सीड मार्केटिंग एवं एग्रोनॉमी डायरेक्टर, कोर्टेवा अग्रिसाइंस ने कहा, “कृषि में तकनीक का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और वह किसानों की जरूरतों के अनुरूप हो। राजस्थान में डिजिटल सेवाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान और बाजार संपर्क को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरसों और मिलेट जैसी महत्वपूर्ण फसलों में उत्पादकता, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच बढ़ाकर किसानों के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।”

कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में श्री अक्षय हाडा, सदस्य, FICCI राजस्थान स्टेट काउंसिल एवं सीएम्डी, अक्षय इंफ्रासीस इंडस्ट्रीज प्रा. लि. ने स्वागत संबोधन दिया। श्रीमती सुरभि राणा, साउथ एशिया सीड मार्केटिंग और एग्रोनॉमी डायरेक्टर, कोर्टेवा अग्रिसाइंस ने थीम एड्रेस दिया। इस अवसर पर “अनलॉकिंग द पोटेंशियल ऑफ़ इंडिया मस्टर्ड सेक्टर : टेक्नोलॉजी, प्रोडक्टिविटी और फारमर प्रोस्पेरिटी” रिपोर्ट का विमोचन किया गया। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष डॉ. हेमा यादव, डायरेक्टर, सीसीएस नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM) ने साझा किए।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का सरसों क्षेत्र एक महत्वपूर्ण चरण में है और इसके विकास के अगले चरण में केवल खेती का रकबा बढ़ाने के बजाय उत्पादकता और तकनीक पर अधिक जोर देना होगा। अध्ययन के अनुसार, हाइब्रिड बीजों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने वाले किसानों की आय में अनुमानित 12.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फसल नुकसान में 23 प्रतिशत की कमी आई। रिपोर्ट में इसे कृषि में तकनीक की भूमिका और किसान की आय तथा फसल की मजबूती बढ़ाने की क्षमता से जोड़ा गया है।

भारत के सबसे बड़े सरसों उत्पादक राज्य के रूप में राजस्थान में हाइब्रिड बीजों, वैज्ञानिक खेती की तकनीकों और बेहतर एक्सटेंशन सपोर्ट को व्यापक स्तर पर अपनाने की बड़ी संभावनाएं बताई गईं। रिपोर्ट में कहा गया कि उत्पादकता में वृद्धि के साथ बेहतर खरीद व्यवस्था, भंडारण ढांचा, गुणवत्ता आधारित मूल्य निर्धारण और प्रोसेसर के साथ मजबूत संपर्क भी जरूरी है। अध्ययन के अनुसार बेहतर बीज, तकनीक और बाजार मिलकर सरसों की पूरी मूल्य श्रृंखला को बदल सकते हैं, जिससे किसानों की समृद्धि के साथ भारत की खाद्य तेल सुरक्षा भी मजबूत होगी।

इंटरनेशनल ईयर ऑफ द वुमन फार्मर 2026 के अवसर पर कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए महिला किसानों का सम्मान किया गया। इस दौरान महिला किसानों के साथ विशेष बाजरा केक कटिंग सेरेमनी भी आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र का समापन FICCI राजस्थान स्टेट काउंसिल के डायरेक्टर एवं हेड श्री अतुल शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

पहले सत्र “Mustard: Research, Innovation & The Road to Edible Oil Security” में सरसों की उत्पादकता बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने, बेहतर बीज एवं अनुसंधान, प्रसंस्करण, मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और नए बाजार अवसर विकसित करने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत की खाद्य तेल सुरक्षा में सरसों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए किसान से लेकर अनुसंधान, उद्योग, प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

सत्र का संचालन श्रीमती सुरभि राणा ने किया। पैनल चर्चा में श्री के.एम. कुमावत, डिप्टी डायरेक्टर, ISOPOM; डॉ. भूपेश वैद, EZ लीड – मिलेट और मस्टर्ड, कोर्टेवा अग्रिसाइंस; डॉ. हेमा यादव, डायरेक्टर, सीसीएस NIAM; डॉ. मनोज मुरारका, प्रेसिडेंट, नेशनल आयल और ट्रेड एसोसिएशन तथा प्रगतिशील सरसों किसान श्री हनुमान गुर्जर ने विचार रखे।

दूसरे सत्र “Diversifying Rajasthan’s Agriculture Economy – New Opportunities, Markets & Value Chains” में राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था में विविधता लाने, नए बाजार विकसित करने तथा कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के अवसरों पर चर्चा हुई।

सत्र में श्री जी.जे.वी. मुरली मोहन, जनरल मैनेजर – साउथ एशिया रीजन, FAMSUN ऑयल्स और फैट्स इंजीनियरिंग तथा श्री वेद प्रकाश यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर, श्री करन नरेंद्र एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जोबनेर, राजस्थान ने कृषि क्षेत्र और उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

तीसरे सत्र “Millets: From Resilient Crop to Market-Led Growth” में मिलेट को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उसे फूड प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, संस्थागत खरीद तथा घरेलू एवं वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने मिलेट के लिए मजबूत मांग, बेहतर बाजार संपर्क और मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों के लिए नए व्यावसायिक अवसर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सत्र का संचालन श्री खुशरो चिनॉय, एसोसिएट डायरेक्टर, फ़ूड और एग्री कंसल्टिंग, PwC Pvt. Ltd. ने किया। पैनल में डॉ. सुरेश कुमार यादव, असिस्टेंट डायरेक्टर, डायरेक्टरेट ऑफ़ मिल्लेट्स डेवलपमेंट, DA&FW, MoA&FW, भारत सरकार, श्रीमती विशालाक्षी वुय्येला, डायरेक्टर, मिनकन एग्रो इंडस्ट्रीज प्रा. ली., डॉ. तनुश्री सिंह, फाउंडर और सीइओ, बेजिक फ़ूड स्टूडियो, श्री राजाराम गुर्जर, किसान तथा श्री पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, ब्रांच मैनेजर – राजस्थान और गुजरात, ITC ली ने भाग लिया।

कॉन्क्लेव के समापन पर विशेषज्ञों ने राजस्थान की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान, किसानों के अनुभव और बाजार की जरूरतों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार सरसों और मिलेट जैसी रेसिलिएंट फसलों में नवाचार, मजबूत मूल्य श्रृंखला और बेहतर बाजार संपर्क किसानों के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ राजस्थान को टिकाऊ और आधुनिक कृषि के क्षेत्र में और मजबूत पहचान दिला सकते हैं।

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