₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में बड़ा एक्शन, फर्म डायरेक्टर समेत 2 और गिरफ्तार
₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में राजस्थान साइबर पुलिस ने फर्म डायरेक्टर समेत 2 और आरोपियों को पकड़ा, अब तक 6 गिरफ्तार।
तस्वीर में साइबर ठगी के आरोपी संदीप कुमार और बरैया राम की तस्वीरें हैं।
राजस्थान साइबर पुलिस ने ₹6.80 करोड़ के ‘बॉस स्कैम’ मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय साइबर क्राइम थाना पुलिस ने भटिंडा, पंजाब निवासी फर्म निदेशक संदीप कुमार और भावनगर, गुजरात निवासी बैंक खाताधारक बरैया राम को गिरफ्तार कर जयपुर लाया है। इस मामले में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साइबर अपराधियों की तलाश में पुलिस की टीमें अन्य राज्यों में भी दबिश दे रही हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई 2 सितंबर को सामने आए ₹6.80 करोड़ के बॉस स्कैम मामले की आगे की जांच के दौरान की गई। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम में से ₹2 करोड़ प्रथम लाभार्थी फर्म के बैंक खाते में जमा हुए थे। इस खाते के निदेशक संदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
साइबर अपराधियों ने कंपनी के निदेशक के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के अकाउंट्स हेड को व्हाट्सऐप के जरिए भुगतान के निर्देश दिए थे। आरोपियों ने परिवादी के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाकर व्हाट्सऐप वेब में मौजूद निदेशक के नंबर को ब्लॉक कर दिया और उसके स्थान पर अपने मोबाइल नंबर को उसी नाम और प्रोफाइल फोटो के साथ सेव कर दिया।
इसके बाद पूर्व में हुई बातचीत की नकल तैयार कर अकाउंट्स हेड को विश्वास में लिया गया। इसके जरिए कंपनी के खाते से ₹6.80 करोड़ तीन बैंक खातों में स्थानांतरित करवा लिए गए। यह भुगतान कंपनी के किसी भी निदेशक द्वारा अधिकृत नहीं था।
जांच में सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी की रकम को छिपाने और आगे पहुंचाने के लिए म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो मुद्रा का इस्तेमाल करता था। टेलीग्राम समूहों के माध्यम से बैंक खाते, एटीएम, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराई जाती थी।
ठगी की रकम खातों में आने के बाद उसे एटीएम या चेक के जरिए नकद निकाला जाता था अथवा यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे बैंक खातों में तत्काल स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद कई बैंक खातों के माध्यम से रकम को घुमाकर यूएसडीटी क्रिप्टो मुद्रा में परिवर्तित किया जाता और आगे भेज दिया जाता था।
गिरफ्तार आरोपी संदीप कुमार ने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के माध्यम से अपना बैंक खाता किराये पर देने के लिए संपर्क किया था। कमीशन के लालच में उसने घटना से करीब 15 दिन पहले कॉरपोरेट बैंक खाता खुलवाया था, जिसमें ₹2 करोड़ जमा हुए। आरोपी ने साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते की चेकबुक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और खाते से जुड़ी सिम उपलब्ध करा दी।
संदीप कुमार को रींगस बुलाकर होटल में ठहराया गया और बैंक खाते से होने वाले लेन-देन को साइबर अपराधियों द्वारा संचालित किया गया। खाते में होने वाले लेन-देन और कमीशन की जानकारी उसे टेलीग्राम के माध्यम से दी जाती रही।
दूसरे आरोपी बरैया राम ने 10 से 15 हजार रुपये के कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, हस्ताक्षरित चेक, एटीएम कार्ड और पासबुक उपलब्ध कराए। उसके खाते में आई साइबर ठगी की रकम में से ₹3.94 लाख रुपये चेक के माध्यम से निकाले गए। इसके अलावा खाते से अन्य लेन-देन भी किए गए।
पुलिस अब व्हाट्सऐप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन की धन की पूरी कड़ी का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। अब तक की जांच में ठगी की रकम प्रथम लाभार्थी खातों से आगे कई खातों में स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई है। अन्य आरोपियों और ठगी की रकम से जुड़े खातों की तलाश जारी है।
उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और डीएसपी गजेंद्र शर्मा, थानाधिकारी, सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के नेतृत्व में निरीक्षक नीरज कुमार, निरीक्षक अजय कुमार, हेड कांस्टेबल दौलतराम, बृजलाल, कांस्टेबल कृष्ण कुमार, सुभाष कुमार और चालक सूबेसिंह की टीम ने इस जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश किया। मामले में पुलिस की जांच ठगी की रकम की पूरी धन शृंखला और उससे जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने के लिए जारी है।