दो साल से फरार ₹25 हजार का इनामी डोडा-पोस्त तस्कर भैराराम पाली से गिरफ्तार
दो साल से फरार 25 हजार रुपये का इनामी डोडा-पोस्त तस्कर भैराराम पाली के तखतगढ़ से गिरफ्तार हुआ। एएनटीएफ ने ऑपरेशन मदभ्रमर में कार्रवाई की।
तस्वीर में आहोर पुलिस थाना के बाहर पुलिस टीम के साथ एक गिरफ्तार व्यक्ति बैठा है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने ‘ऑपरेशन मदभ्रमर’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दो साल से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी डोडा-पोस्त तस्कर भैराराम पुत्र सालूराम देवासी, निवासी अगवरी, थाना आहोर, जिला जालोर को पाली के तखतगढ़ से गिरफ्तार किया है। राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा से मादक पदार्थों की सप्लाई का स्वयंभू सूत्रधार बताए जा रहे भैराराम की गिरफ्तारी एएनटीएफ की इस अभियान के तहत 90वीं बड़ी सफलता बताई गई है।
एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा एवं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री दिनेश एमएन के मार्गदर्शन में मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधीक्षक जालोर की ओर से भैराराम की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
भैराराम ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। पढ़ाई छोड़ने के बाद वह भेड़-बकरी चराने और खेती-बाड़ी का काम करने लगा। वर्ष 2019 में पिता की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ गईं। इसी दौरान वह धीरे-धीरे तस्करों के संपर्क में आया और डोडा-पोस्त की तस्करी से जुड़ गया।
शुरुआत में वह अपने साथियों के साथ वाहनों में डोडा-पोस्त की खेप लाने-ले जाने के लिए चालक के रूप में काम करता था। प्रत्येक चक्कर के करीब 50 हजार रुपये उसे मिलते थे। बाद में तस्करी के संपर्क बढ़ते गए और वह स्वयं मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में सक्रिय हो गया।
तस्करी के दौरान पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए भैराराम अपने साथियों को आगे रखकर स्वयं पीछे रहने की रणनीति अपनाता था। वर्ष 2024 में आहोर थाना पुलिस ने डोडा-पोस्त की खेप ले जा रहे उसके साथियों को वाहन सहित पकड़ लिया था। भैराराम भी उनके साथ था, लेकिन मौके से फरार होने में सफल रहा।
इसके बाद उसने भाद्राजून के एक अन्य तस्कर के साथ मिलकर फिर डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। बाद में उसका साथी भी पुलिस की गिरफ्त में आ गया और भैराराम का नाम सामने आने पर उसने फिर अपना ठिकाना बदल लिया। पुलिस से बचने के बावजूद उसने तस्करी नहीं छोड़ी और नए संपर्कों के माध्यम से अपना नेटवर्क खड़ा करता रहा।
गिरफ्तारी से बचने के लिए भैराराम करीब दो वर्षों तक लगातार ठिकाने बदलता रहा। उसने हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर फरारी काटी। राजस्थान में वह चित्तौड़गढ़, जयपुर, पाली और उदयपुर सहित कई शहरों में ठिकाने बदलता रहा। परिवार और तस्कर साथियों से संपर्क करने के लिए वह राह चलते दूसरे लोगों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था, ताकि उसकी पहचान और ठिकाने का पता नहीं चल सके।
करीब दो साल तक पुलिस से बचने के बाद भैराराम ने लगभग 15 दिन पहले फिर से डोडा-पोस्त की तस्करी शुरू कर दी। पुलिस से बचने के लिए उसने पाली के तखतगढ़ में किराये का कमरा लिया और वहीं छिपकर रहने लगा। उसे उम्मीद थी कि नया ठिकाना और बदली हुई पहचान पुलिस को उसकी भनक नहीं लगने देंगे, लेकिन तस्करी दोबारा शुरू करते ही एएनटीएफ का सूचना तंत्र सक्रिय हो गया।
एएनटीएफ टीम ने लगातार निगरानी और सूचना संकलन के आधार पर उसके ठिकाने का पता लगाया और योजनाबद्ध तरीके से दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
भैराराम की गिरफ्तारी में उसकी तस्करी की शेखी भी अहम कड़ी बनी। वह अपने एक तस्कर साथी के सामने अपनी तस्करी के तरीके की शेखी बघार रहा था। उसने खुद को तस्करी का मुख्य सूत्रधार बताते हुए कहा कि वह हर बार पुलिस को चकमा देकर निकल जाता है और इस बार भी तीन-चार चक्कर लगाने के बाद यहां से निकल जाएगा, जबकि उसका साथी पकड़ा जाएगा।
भैराराम की यही शेखी उसके लिए भारी पड़ गई। उसके साथी ने एएनटीएफ से संपर्क कर उसके तखतगढ़ में होने की सूचना दे दी। सूचना मिलते ही एएनटीएफ की टीम बिना समय गंवाए तखतगढ़ पहुंची और उसके साथी के ठिकाने पर दबिश देकर 25 हजार रुपये के इनामी भैराराम को धर दबोचा।
भैराराम की गिरफ्तारी के साथ एएनटीएफ ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी से मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े उसके संपर्कों और नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है।