सहकारिता विभाग समीक्षा: जयपुर संभाग प्रथम, कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में गोदाम निर्माण, ऑडिट और डिजिटल कार्यप्रणाली को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए।
राजस्थान के सहकारिता विभाग में कार्यों की प्रगति और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए जयपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारी।
जयपुर, 12 अक्टूबर। राजस्थान के सहकारिता विभाग में कार्यों की प्रगति और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (KPI) के आधार पर संभागों, जिलों और ब्लॉक स्तर पर रैंकिंग जारी की गई है। शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने अधिकारियों को विभागीय योजनाओं पर त्वरित कार्रवाई कर आमजन तक उनका लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने गोदाम निर्माण से लेकर ऑडिट, डेयरी समितियों के पंजीकरण, खाद वितरण और डिजिटल कार्यप्रणाली तक विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
डॉ. समित शर्मा ने सोमवार को नेहरू सहकार भवन स्थित मीटिंग हॉल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि ‘सहकार से समृद्धि’ कार्यक्रम के क्रियान्वयन, अधिनियम के तहत वैधानिक दायित्वों के निर्वहन और प्रशासनिक कार्यों के आधार पर KPI के माध्यम से खंडों, जिलों और संभागों को रैंकिंग दी गई है। संभाग स्तर पर जयपुर प्रथम, भरतपुर द्वितीय और जोधपुर तृतीय स्थान पर रहे। उप रजिस्ट्रार कार्यालय स्तर पर बूंदी जिला प्रथम, झुंझुनूं द्वितीय और अनूपगढ़ तृतीय स्थान पर रहे। ब्लॉक सहकारी निरीक्षक श्रेणी में अलवर जिले का कठूमर ब्लॉक प्रथम, जोधपुर जिले का बावड़ी ब्लॉक द्वितीय और जोधपुर जिले का चामू ब्लॉक तृतीय स्थान पर रहा।
बैठक में ‘सहकार से समृद्धि’ अभियान के तहत विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के निर्धारित लक्ष्यों की संभागवार और जिलेवार समीक्षा की गई। अधिकारियों को गोदाम निर्माण के लिए समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजने, भूमि आवंटन कराने, अनुपयोगी गोदामों को उपयोगी बनाने, कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने तथा कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से ई-मित्र सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही ई-पैक्स सर्टिफिकेट जारी कराने पर भी जोर दिया गया।
भूमिहीन केवीएसएस में गोदाम निर्माण के लिए भूमि आवंटन, जिलों में गोदाम निर्माण के लिए लक्षित समितियों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों और रजिस्ट्रार कार्यालय से स्वीकृत गोदाम निर्माण कार्य शुरू करने वाली समितियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। डॉ. शर्मा ने निर्मित गोदामों के उपयोगिता प्रमाण-पत्र, 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले पात्र पंजीकृत गोदामों तथा जिलों में केवीएसएस की ओर से उपयोग किए जा रहे गोदामों की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोदाम निर्माण केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
डेयरी सहकारी समितियों की समीक्षा के दौरान डॉ. शर्मा ने राज्य में नई डेयरी समितियों के गठन और निष्क्रिय समितियों को यथासंभव सक्रिय करने के निर्देश दिए। जिन निष्क्रिय समितियों को सक्रिय करना संभव नहीं है, उनके शीघ्र अवसायन की कार्रवाई करने को कहा गया। सभी उप एवं सहायक रजिस्ट्रारों को जिला दुग्ध संघों से जानकारी प्राप्त कर सक्रिय और निष्क्रिय समितियों की स्थिति स्पष्ट करने तथा वर्तमान में पंजीकरण के लिए लंबित समितियों का आगामी तीन दिवस में पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
विभागीय कामकाज में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर भी सख्ती दिखाई गई। बैठक में कार्यालयों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लागू एईबीएस प्रणाली की समीक्षा की गई। बार-बार कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। वहीं, राजकाज ई-फाइलिंग की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित ई-फाइलों का शीघ्र निस्तारण करने को कहा गया। डॉ. शर्मा ने डिजिटल माध्यमों के अधिकतम उपयोग से कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों को अगली समीक्षा बैठक से पहले निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति में स्पष्ट सुधार लाने के निर्देश दिए और समयबद्धता, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा गुणवत्तापूर्ण कार्य निष्पादन को विभाग की प्राथमिकता बताया।
ऑडिट कार्यों की समीक्षा करते हुए शासन सचिव ने सभी क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारियों और विशेष लेखा परीक्षकों को चालू ऑडिट 31 अक्टूबर तक 90 प्रतिशत तथा 30 नवंबर तक शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए। बैकलॉग ऑडिट को 31 दिसंबर तक शत-प्रतिशत पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। बैठक में पैक्स ऑन सिस्टम की जिलेवार प्रगति, ऑडिट फीस की वसूली, विशेष लेखा परीक्षकों द्वारा विभागीय सीए और सीए फर्मों के अंकेक्षकों से ऑडिट कराई गई समितियों के निरीक्षण की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को ऑडिट कार्य में तेजी लाकर इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
सहकारी अधिनियम और उसके तहत ऑडिट संबंधी प्रावधानों की जानकारी बढ़ाने के लिए बैठक के दौरान राज्य के सभी प्रतिभागियों का गूगल डॉक्स के माध्यम से बहुविकल्पीय ऑनलाइन टेस्ट आयोजित किया गया। इसके बाद टेस्ट का परिणाम भी घोषित किया गया।
खाद की उपलब्धता और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। सभी उप रजिस्ट्रारों को कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर डीएपी और यूरिया की उपलब्धता तथा उसके अनुरूप वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया। नकली खाद के मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए। एमएसपी खरीद के लिए अधिकारियों को एग्रीस्टेक के साथ समन्वय स्थापित करने, आधार आधारित भुगतान व्यवस्था बनाए रखने और पारदर्शी तरीके से खरीद सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों के विस्तार पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को सभी जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर यथासंभव प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने के निर्देश दिए गए। विभागीय योजनाओं, वैधानिक दायित्वों और प्रशासनिक कार्यों की इस समीक्षा के जरिए अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य हासिल करने तथा योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई।