जयपुर में डिजिटल अरेस्ट कर 2 करोड़ की ठगी, आरोपी ललित विश्वास गिरफ्तार
बुजुर्ग दंपती को 20 दिन वीडियो कॉल पर डराकर 2 करोड़ रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी को पकड़ा।
जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 2 करोड़ की ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी ललित विश्वास।
जयपुर में पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई और अन्य सरकारी संस्थाओं के अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग दंपती को करीब 20 दिन तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर 2 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर की टीम ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के निवासी आरोपी ललित विश्वास को गिरफ्तार किया है। प्रकरण में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों, विशेषकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में साइबर ठगी के नेटवर्क और धनराशि के लेन-देन की जांच जारी है।
पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ाव का भय दिखाया
घटना के अनुसार, जयपुर निवासी परिवादिया ने 11 सितंबर 2026 को रिपोर्ट दर्ज करवाई कि 17 अगस्त को एक व्यक्ति ने उन्हें फोन कर स्वयं को पुलिस इंस्पेक्टर बताया और उनके खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही। इसके बाद कथित एटीएस अधिकारियों के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करवाई गई।
आरोपियों ने परिवादिया और उनके पति को बताया कि उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वाले लोगों की सूची में शामिल है और उनके बैंक खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन में किया जा रहा है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया।
फर्जी दस्तावेज भेजकर 20 दिन तक वीडियो कॉल पर रहने का दबाव
अनुसंधान के अनुसार, साइबर ठगों ने पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम एवं पहचान का कथित दुरुपयोग किया। आरोपियों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट तथा सरकारी और बैंकिंग प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज भेजे।
बुजुर्ग दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया। गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर करवाई गई। इस तरह दंपती से कुल 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विभिन्न खातों में स्थानांतरित करवाई गई।
खाते में जमा हुए 7 लाख रुपये, 70 हजार रुपये कमीशन लेने का आरोप
पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), व्हाट्सऐप चैट, बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों में भेजी गई थी।
आरोपी ललित विश्वास ने अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों को बैंक खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और धनराशि के लेन-देन में सहायता की। जांच के अनुसार, उसके द्वारा उपलब्ध करवाए गए एचडीएफसी बैंक खाते में 2 सितंबर 2026 को 7 लाख रुपये जमा हुए। इसके बदले आरोपी ने कथित रूप से 70 हजार रुपये कमीशन प्राप्त किया।
अनुसंधान में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने परिचित साहिब से एचडीएफसी बैंक खाते से संबंधित खाली चेक प्राप्त किया था। इसके बाद उसने उक्त चेक असीम विश्वास तथा अतुन के मोबाइल नंबरों पर भेजा था। पुलिस आरोपी की भूमिका और इस लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम श्री शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन में पुलिस उप अधीक्षक एवं थानाधिकारी श्री गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया। टीम में पुलिस निरीक्षक श्री राधेश्याम तथा कांस्टेबल श्री कृष्ण कुमार और श्री लक्ष्मण कुमार शामिल रहे। मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद साइबर ठगी के नेटवर्क और रकम के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।