जयपुर, 13 अगस्त। मेहनत, नवाचार और खेती के प्रति समर्पण से उदयपुर जिले के झाड़ोल क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक श्री प्रेमचंद कपाया ने अब प्रदेश स्तर पर नई पहचान बनाई है। जैविक, पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के प्रयासों को सरकारी स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें “किसान ब्रांड एम्बेसडर” एवं ट्रेनर के रूप में नियुक्त किया गया है। इस जिम्मेदारी के लिए उन्हें नियत मासिक ₹11,000 का मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।

माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में झाड़ोल में आयोजित रात्रि ग्राम विकास चौपाल कार्यक्रम में श्री प्रेमचंद कपाया ने जैविक, पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के संबंध में अपने महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए थे।

कृषक के अनुभव और सुझावों ने चौपाल में उपस्थित माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास को प्रभावित किया। उनके निर्देशानुसार कृषि विभाग, राजस्थान सरकार ने श्री प्रेमचंद कपाया को “किसान ब्रांड एम्बेसडर” एवं ट्रेनर के रूप में नियुक्त करने का निर्णय लिया। यह उपलब्धि श्री कपाया के लिए गौरव का विषय है और उन किसानों के लिए भी प्रेरणा है, जो कृषि में नवाचार तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

उदयपुर में आयोजित कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रगतिशील कृषक श्री प्रेमचंद कपाया को कृषि विभाग, राजस्थान सरकार की ओर से “किसान ब्रांड एम्बेसडर” एवं ट्रेनर के रूप में नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस अवसर पर एक किसान की मेहनत और अनुभव को सरकारी स्तर पर पहचान मिलने की मिसाल सामने आई।

अब श्री कपाया अपने अनुभव और ज्ञान को केवल अपने खेत तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि प्रदेश के किसानों के बीच पहुंचाकर खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने में योगदान देंगे।

“किसान ब्रांड एम्बेसडर” एवं ट्रेनर के रूप में श्री प्रेमचंद कपाया राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों को जैविक, पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करेंगे। वे किसानों के साथ संवाद, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं के माध्यम से खेती की उन्नत एवं टिकाऊ तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा कृषि में नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

इस कार्य के लिए श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, कोटा द्वारा उन्हें नियत मासिक ₹11,000 का मानदेय प्रदान किया जाएगा।

श्री प्रेमचंद कपाया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि खेत में अर्जित व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव भी कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। उन्होंने अपने अनुभवों को किसानों के हित में साझा करने का जो प्रयास किया, उसे राज्य सरकार ने पहचान दी और अब उन्हें प्रदेश के किसानों तक प्राकृतिक एवं जैविक खेती का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उनकी यह यात्रा “किसान से किसान तक ज्ञान” के प्रभावी मॉडल को मजबूत करती है, जिसमें किसान स्वयं अपने अनुभवों के आधार पर दूसरे किसानों को प्रेरित एवं प्रशिक्षित करते हैं।

राजस्थान सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा टिकाऊ कृषि व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। श्री प्रेमचंद कपाया की नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्रदेश में जैविक, पारंपरिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रसार, किसानों को नवाचारों से जोड़ने तथा कृषि को अधिक टिकाऊ एवं समृद्ध बनाने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

झाड़ोल की ग्राम विकास चौपाल से शुरू हुआ यह सफर अब प्रदेशभर के खेतों तक पहुंचेगा, जहां एक किसान का अनुभव हजारों किसानों के लिए नई राह दिखाएगा।

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