राजस्थान सरकार ने किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026 की नई निविदा प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। नई निविदा में किसानों की सुरक्षा, बीमा कंपनियों की जवाबदेही, आधुनिक तकनीक के उपयोग, समयबद्ध दावा निस्तारण और राज्य पर वित्तीय भार कम करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 तक के लिए पूर्व में तीन वर्षीय निविदा आमंत्रित की गई थी, जबकि वर्ष 2026 के लिए एक वर्षीय निविदा जारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत राज्य के नवसृजित जिलों सहित सभी 41 जिलों को 8 क्लस्टरों में विभाजित किया गया है। साथ ही एक बीमा कंपनी को अधिकतम दो क्लस्टर ही आवंटित किए जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे बीमा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण बीमा सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पूर्व की तरह कप-एंड-कैप मॉडल (60:130) को यथावत रखा गया है। किसानों को बेसिक बीमा कवर के साथ खरीफ मौसम में निष्फल अथवा बाधित बुवाई (Prevented/Failed Sowing) तथा खरीफ और रबी दोनों मौसमों में पोस्ट हार्वेस्ट हानि (Post Harvest Loss) का लाभ भी पूर्ववत मिलता रहेगा।

नई निविदा में पहली बार YES & TECH तकनीक को प्रभावी रूप से शामिल किया गया है। गेहूं और सोयाबीन की फसल में फसल कटाई प्रयोग तथा YES & TECH आधारित आंकड़ों को 50:50 के अनुपात में भारित करते हुए औसत उपज का आकलन किया जाएगा। भविष्य में चयनित अन्य फसलों के लिए यह अनुपात 70:30 रहेगा। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से फसल उपज का आकलन अधिक वैज्ञानिक, सटीक और पारदर्शी होगा तथा दावों के निर्धारण में मानवीय हस्तक्षेप की संभावना कम होगी।

बीमा कंपनियों की वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नई निविदा में पहली बार 2 प्रतिशत बिड सिक्योरिटी, अधिकतम 100 करोड़ रुपये तथा 5 प्रतिशत कार्य निष्पादन प्रतिभूति का प्रावधान किया गया है। इससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी और अधिक सुनिश्चित होगी।

किसानों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पहली बार स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान भी किए गए हैं। पोस्ट हार्वेस्ट हानि के मामलों में 48 घंटे के भीतर सर्वेयर नियुक्त नहीं करने अथवा निर्धारित समय में सर्वे नहीं करने पर प्रति बीमा इकाई 20,000 रुपये तक की शास्ति का प्रावधान किया गया है।

इसी प्रकार निर्धारित अवधि में सर्वे नहीं करने पर प्रति शिकायत 1,000 रुपये की शास्ति लगाई जाएगी। वहीं बीमा दावों का समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में बीमा कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करना होगा।

नई व्यवस्था के तहत बीमा कंपनियों के लिए बीमा पॉलिसी जारी होने के सात दिवस के भीतर संबंधित किसान को उसकी प्रति उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है, ताकि किसानों को समय पर बीमा संबंधी जानकारी मिल सके।

योजना के प्रभावी संचालन और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) के अधीन बीमा कंपनी द्वारा एक तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा आयुक्तालय स्तर पर भी दो अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।

पोस्ट हार्वेस्ट हानि के सर्वेक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वेयर को सर्वे प्रपत्र की तीन प्रतियां तैयार करनी होंगी। इनमें एक प्रति किसान को, दूसरी कृषि विभाग को और तीसरी प्रति सर्वेयर के अभिलेख के लिए सुरक्षित रखी जाएगी। इससे सर्वे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और किसान के पास भी सर्वे का प्रमाण उपलब्ध रहेगा।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के परिणामस्वरूप राज्य को पहले की तुलना में अत्यंत कम प्रीमियम दर प्राप्त हुई है। पूर्ववर्ती निविदा में औसत सकल प्रीमियम दर 9.63 प्रतिशत थी, जो वर्तमान सरकार के समय जारी नई निविदा में घटकर मात्र 1.19 प्रतिशत रह गई है।

उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा देय कुल प्रीमियम राशि 979.15 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 645 करोड़ रुपये रह गई है। इससे किसानों को लगभग 335 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत होगी।

इसी प्रकार राज्यांश प्रीमियम अनुदान 1,878.27 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 51 करोड़ रुपये रह गया है। इससे राज्य सरकार पर वित्तीय भार में उल्लेखनीय कमी आएगी और सार्वजनिक संसाधनों का अधिक प्रभावी तथा जनहितकारी उपयोग संभव होगा।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पारदर्शी, तकनीक आधारित, जवाबदेह और किसान हितैषी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नई निविदा के माध्यम से किसानों को बेहतर बीमा सेवाएं, समयबद्ध दावा निस्तारण, आधुनिक तकनीक का लाभ और अधिक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करने, तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और किसानों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रावधान योजना के क्रियान्वयन को नई मजबूती देंगे। नई निविदा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल क्षति की स्थिति में समय पर राहत और संबल उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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