तस्वीर में बाएं से दाएं आरिफ काठात उर्फ दीपू, फिरोज काठात उर्फ माफिया और कानू सिंह उर्फ पायथन दिखाई दे रहे हैं।

जयपुर, 5 अगस्त। राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। अब इस संगठित नेटवर्क से जुड़े कुल आठ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) श्री विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी नेटवर्क का लगातार खुलासा हो रहा है।

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य भारत के विभिन्न राज्यों, विशेषकर राजस्थान के युवाओं को 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन और आकर्षक विदेशी नौकरी का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड भेजते थे। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र अपने कब्जे में लेकर उन्हें साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बनाया जाता था और डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टो फ्रॉड तथा जॉब स्कैम जैसी साइबर ठगी करवाने के लिए मजबूर किया जाता था।

पुलिस ने बुधवार को इस नेटवर्क से जुड़े तीन और आरोपियों आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है।

पुलिस जांच के अनुसार फिरोज काठात उर्फ ‘माफिया’ वर्ष 2025 के अंत में बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया पहुंचा था। वहां उसने एक वर्ष के एग्रीमेंट पर महिला बनकर सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीयों से दोस्ती करने और उन्हें फर्जी क्रिप्टो योजनाओं में फंसाने की ट्रेनिंग ली। वह नेटवर्क के लिए म्यूल अकाउंट्स और फर्जी प्रोफाइल का प्रबंधन करता था।

कानू सिंह उर्फ ‘पायथन’ अप्रैल 2025 में होटल में नौकरी दिलाने के नाम पर कंबोडिया पहुंचा था। वहां उसने अंग्रेजी और चीनी भाषा में तैयार अनुबंध पर हस्ताक्षर किए तथा महिला प्रोफाइल के जरिए साइबर ठगी करने के साथ प्रति व्यक्ति कमीशन के लालच में चार अन्य भारतीय युवाओं को भी कंबोडिया स्थित स्कैम कंपाउंड में पहुंचाया।

आरिफ काठात उर्फ ‘दीपू’ फर्जी फेसबुक और व्हाट्सएप प्रोफाइल के माध्यम से निवेशकों को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर नकली बढ़ा हुआ बैलेंस दिखाकर क्रिप्टो निवेश के लिए प्रेरित करता था। इसके अलावा वह “घर बैठे पैसे कमाएं” के नाम पर प्रोसेसिंग फीस के रूप में लोगों से मोटी रकम ऐंठता था।

पुलिस ने बताया कि पूर्व में कोलकाता से गिरफ्तार आरोपियों जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि उर्फ माही और अनिल उर्फ डेविल को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाकर की गई गहन पूछताछ तथा उनके कब्जे से बरामद मोबाइल फोन, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, वीपीएन, विदेशी संपर्क और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब मानव तस्करी, साइबर स्लेवरी और करोड़ों रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश में नौकरी के आकर्षक ऑफर स्वीकार करने से पहले संबंधित एजेंसी और कंपनी का सत्यापन अवश्य करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेज न दें। सोशल मीडिया पर निवेश, क्रिप्टो या गारंटीड रिटर्न के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या फाइल को डाउनलोड करने से बचें। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट या ऑनलाइन धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

यह कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन तथा डीएसपी/थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में प्रोबेशनर आरपीएस चित्तौड़गढ़ मनीष शर्मा, पुलिस निरीक्षक स्टेट साइबर क्राइम थाना दामोदर, सहायक उप-निरीक्षक एवं डीएसबी प्रभारी ब्यावर कमल किशोर, हेड कांस्टेबल साइबर थाना उदयपुर प्रदीप तथा कांस्टेबल किशन, विजय सिंह, महेंद्र और बृजमोहन, स्टेट साइबर क्राइम थाना जयपुर शामिल रहे। इस कार्रवाई के साथ अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी, मानव तस्करी और साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है।

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