जयपुर में NAPCON 2026 का आगाज कल, 20 देशों के 2,000 से अधिक फेफड़ों के विशेषज्ञ करेंगे मंथन
भारत और 20 देशों के 2000 से अधिक पल्मोनोलॉजिस्ट वायु प्रदूषण, अस्थमा और सीओपीडी की चुनौतियों और आधुनिक उपचार तकनीकों पर चर्चा करेंगे।
जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय श्वसन चिकित्सा सम्मेलन NAPCON 2026 से पूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते आयोजक और विशेषज्ञ, जहां वायु प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारियों के उपचार पर चर्चा की गई।
जयपुर में 22 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय श्वसन चिकित्सा सम्मेलन NAPCON 2026 में भारत और 20 अन्य देशों के 2,000 से अधिक प्रमुख पल्मोनोलॉजिस्ट, रेस्पिरेटरी फिजिशियन, शोधकर्ता और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर शामिल होंगे। चार दिवसीय इस सम्मेलन में वायु प्रदूषण, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों से जुड़ी अन्य बीमारियों की बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा होगी। जयपुर के बी.एम. बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में 500 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस, इंडिया (NCCP-I) और इंडियन चेस्ट सोसाइटी (ICS) का 28वां संयुक्त वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन NAPCON 2026 श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में शोध, चिकित्सकीय अनुभव और नवीन तकनीकों के आदान-प्रदान का प्रमुख मंच बनेगा। इसमें फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते बोझ, वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव तथा COPD, अस्थमा और एलर्जी जैसी स्थितियों के निदान एवं उपचार में हुए नवीनतम विकास पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। सम्मेलन में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्रों के माध्यम से वैज्ञानिक साक्ष्यों, क्लिनिकल अनुभवों और नवाचारों पर चर्चा की जाएगी, जिससे भारत और वैश्विक स्तर पर श्वसन संबंधी चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों को बढ़ावा मिल सके।
NAPCON 2026 के आयोजन अध्यक्ष और जयपुर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि यह सम्मेलन श्वसन चिकित्सा समुदाय के लिए एक साथ आने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि फेफड़ों का स्वास्थ्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी प्राथमिकता बन चुका है, ऐसे में इस आयोजन का विशेष महत्व है। भारत और कई अन्य देशों से 2,000 से अधिक पल्मोनोलॉजिस्ट तथा श्वसन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी से जयपुर वैज्ञानिक विचारों के आदान-प्रदान और पेशेवर सहयोग का केंद्र बनेगा। सम्मेलन का उद्देश्य ऐसा मंच तैयार करना है, जहां नवीनतम शोध, क्लिनिकल अनुभवों और नई तकनीकों पर सार्थक चर्चा हो सके। इसके साथ ही वैज्ञानिक प्रगति को बेहतर निदान, उपचार और श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों की दीर्घकालिक देखभाल में बदलने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सम्मेलन के आयोजन सचिव और जयपुर स्थित RUHS कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. विनोद जोशी ने कहा कि NAPCON की प्रमुख विशेषता अनुभवी चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और युवा चिकित्सा पेशेवरों को एक मंच पर लाना है, ताकि वे अपने दैनिक चिकित्सकीय कार्यों में सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कर सकें। उन्होंने कहा कि श्वसन रोगों में समय रहते पहचान, सटीक निदान और नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। हालांकि, कई बार मरीज लक्षण गंभीर होने के बाद ही उपचार के लिए पहुंचते हैं। सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों और आपसी चर्चाओं के माध्यम से साक्ष्य-आधारित चिकित्सकीय पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ समय पर उपचार, मरीजों को शिक्षित करने और व्यापक श्वसन देखभाल के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
NAPCON 2026 के आयोजन सचिव और वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रमाकांत दीक्षित ने कहा कि निदान और उपचार की तकनीकों में तेजी से हो रहे बदलावों से श्वसन चिकित्सा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल रही हैं। एडवांस्ड ब्रोंकोस्कोपी और एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड से लेकर इंटरस्टिशियल फेफड़ों की बीमारियों तथा सांस की नली की जटिल समस्याओं के बेहतर मूल्यांकन तक, निरंतर चिकित्सा शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्रतिनिधियों को विशेषज्ञों से सीखने, व्यावहारिक अनुभव साझा करने और पल्मोनरी मेडिसिन में हुई प्रगति को चिकित्सकीय परिस्थितियों में लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा, ताकि इन विकासों का लाभ मरीजों तक पहुंच सके।
सम्मेलन से पहले आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस, इंडिया के सचिव डॉ. एस. एन. गौर और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के सचिव डॉ. सुभाकर कांडी मौजूद रहे। इनके अलावा NAPCON 2026 की वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट आर. एन. सोलंकी, कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. महेश महीच, डॉ. शुभ्रा जैन, डॉ. गोविंद राजावत तथा कार्यशाला समन्वयक भी उपस्थित थे।
नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस, इंडिया और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन की मेजबानी जयपुर कर रहा है। भारत और विदेशों से विशेषज्ञों की भागीदारी से पेशेवर नेटवर्किंग, वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अनुभवी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उभरते चिकित्सा पेशेवरों को एक मंच पर लाने वाला NAPCON 2026 श्वसन चिकित्सा के बदलते परिदृश्य, आधुनिक निदान और उपचार पद्धतियों तथा फेफड़ों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों पर व्यावहारिक चर्चा का अवसर प्रदान करेगा।