जवाहर सिंह बेढम का गहलोत पर हमला, 37 खनन लीज और RPSC नियुक्ति पर मांगा जवाब
राजस्थान में जवाहर सिंह बेढम ने अशोक गहलोत से बड़ा काटेचा गांव की 37 खनन लीज में 16 रिश्तेदारों को आवंटित होने, ओएसडी के आरोपों, निजी सुरक्षाकर्मी और आरपीएससी सदस्य से जुड़े मामलों पर जवाब मांगा।
राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए उनसे अपने शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार, खनन लीज आवंटन, पेपरलीक और आरपीएससी से जुड़े मामलों पर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने भाषण में तथ्यों और सच्चाई के साथ पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को आईना दिखाया है, जिससे अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता बौखला गए हैं।
जयपुर में 3 नवम्बर, 2026 को जारी बयान में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भाषण 100 प्रतिशत सच्चाई पर आधारित था। सच्चाई सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिक्रियाएं और कांग्रेस नेताओं की बेचैनी उनकी घबराहट को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गहलोत को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल के उन मामलों का जवाब देना चाहिए, जिन पर प्रदेश की जनता आज भी स्पष्टीकरण चाहती है। जनता को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय अपने सवालों के स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब चाहिए।
बेढम ने जोधपुर के बड़ा काटेचा गांव में खनन लीज आवंटन का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि वहां जारी की गई 37 खनन लीज में से 16 लीज अशोक गहलोत के रिश्तेदारों को कैसे आवंटित हुईं? उन्होंने पूछा कि क्या यह सच नहीं है कि इन आवंटनों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और बाद में सरकार को इन्हें निरस्त करना पड़ा था? आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां थीं कि इन खनन लीज को रद्द करना पड़ा?
गृह राज्य मंत्री ने गहलोत के तत्कालीन ओएसडी से जुड़े मामले पर भी जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत बताएं कि क्या उनके ही ओएसडी ने उन पर गलत काम कराने के आरोप नहीं लगाए थे? यदि ऐसा हुआ था तो उन आरोपों की सच्चाई क्या है और पूर्व मुख्यमंत्री ने आज तक इस पर सार्वजनिक रूप से संतोषजनक जवाब क्यों नहीं दिया? उन्होंने गहलोत के निजी सुरक्षाकर्मी के जेल में बंद होने से जुड़े प्रकरण पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। बेढम के अनुसार, जनता जानना चाहती है कि इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि क्या थी और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
आरपीएससी से जुड़े मामले को लेकर भी बेढम ने पूर्व मुख्यमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि गहलोत के कार्यकाल में नियुक्त किए गए आरपीएससी सदस्य के जेल में होने और उसके कथित तौर पर पैसे देकर सदस्य बनने की बात स्वीकार किए जाने से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब कौन देगा? उन्होंने कहा कि नियुक्तियों जैसी संवेदनशील संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने की स्थिति में इसकी नैतिक जिम्मेदारी तत्कालीन सरकार की बनती है। युवाओं के भविष्य और उनकी मेहनत से जुड़े ऐसे मामलों पर राजनीतिक चुप्पी स्वीकार नहीं की जा सकती।
बेढम ने कहा कि राजस्थान के युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद के साथ मेहनत की है। भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनके विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई है। ऐसे में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
उन्होंने अशोक गहलोत के शासनकाल में हुए अन्य मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जेजेएम, पेपरलीक और मिड-डे-मील घोटाला हुआ। उनकी सरकार 18 महीने तक होटल में बंद रही और सरकार बचाने के लिए फोन टेपिंग तक करवाई गई। बेढम ने इन सभी घटनाओं को गहलोत के कुशासन के जिंदा सबूत बताते हुए कहा कि उन्हें इन मामलों के लिए आमजन से माफी मांगनी चाहिए।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार पारदर्शिता, सुशासन और जवाबदेही के संकल्प के साथ काम कर रही है। प्रदेश की जनता को सच्चाई बताना और व्यवस्था में विश्वास बहाल करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता अपनी राजनीतिक असहजता छिपाने के लिए चाहे जितने आरोप लगाएं, लेकिन पुराने मामलों से जुड़े सवालों का जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है।
बेढम ने दोहराया कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भाषण पर प्रतिक्रिया देने के बजाय बड़ा काटेचा गांव की खनन लीज, अपने ओएसडी के आरोपों, निजी सुरक्षाकर्मी के जेल में होने और आरपीएससी सदस्य से जुड़े प्रकरणों पर तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता इन मामलों की सच्चाई जानना चाहती है। सवालों से बचने और बयानबाजी करने से सच्चाई नहीं बदलती।