भगवान श्री झूलेलाल की महाआरती के साथ 101 परिंदों का वितरण, सिंधी समाज की आस्था और सेवा का अद्भुत संगम

जयसिंहपुरा खोर स्थित झूलेलाल मंदिर में भव्य महाआरती और 101 परिंदों के वितरण का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धार्मिक वातावरण के बीच हुए इस कार्यक्रम ने आस्था और सेवा का अनोखा संगम प्रस्तुत किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

Update: 2026-06-17 14:05 GMT

जयपुर के जयसिंहपुरा खोर स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सेवा समिति के सदस्यों द्वारा मुख्य अतिथि व गणमान्य व्यक्तियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित करने का दृश्य।

जयपुर के जयसिंहपुरा खोर क्षेत्र में मंगलवार को आस्था, परंपरा और सेवा का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जब भगवान श्री झूलेलाल मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया और साथ ही 101 परिंदों का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम युवा जागृति संगठन एवं भगवान श्री झूलेलाल मंदिर सेवा समिति (जयसिंहपुरा खोर) की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सिंधी समाज के श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

कार्यक्रम संयोजक एवं समाजसेवी दौलत त्रिलोकानी ने जानकारी देते हुए बताया कि जयसिंहपुरा खोर स्थित सब्जी मंडी के निकट स्थित मंदिर में यह आयोजन विशेष रूप से “चंड चांद” के पावन अवसर पर किया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने एक साथ भगवान श्री झूलेलाल की महाआरती कर पल्लव प्राप्त किया। वातावरण पूरी तरह भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा।

इस अवसर पर समाजसेवी तुलसी त्रिलोकानी, गिरधारी कृष्णानी, कन्हैयालाल पारवानी, किशन पूजानी, अजय मूलचंदानी, दीपक धामेजानी, कमलेश नानवानी, नरेंद्र जोधपुरी, देवीदास चेलानी, राजेश टहलानी, शशिकांत शर्मा, मनोज सेवानी, प्रेमचंद फूलवानी, ओमप्रकाश सैनी, करन अलवानी, विजय हरलानी, राजेश गोपलानी, मुकेश मोतियानी, पुरुषोत्तम गुलवानी, पुरुषोत्तम उमरानी, अशोक हरलानी, मुकेश तोतलानी, श्याम कमलानी, धर्मेंद्र पमनानी, मनोज जेसवानी, कृष्ण कुमार अग्रवाल (मनीष), प्रेम शर्मा, खेमचंद केलवानी, विजय हासानी, तरुण मोटवानी, धर्मेंद्र त्रिलोकानी, अक्षय रजवानिया, नरेंद्र जेठवानी, मनीष सोमानी, प्रकाश समलानी, महेश खटवानी, राहुल लोकवानी, पदमा हेमनानी, मंजू टहलानी, हर्षा सेवानी और अंजना त्रिलोकानी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने शरबत एवं प्रसादी ग्रहण की। आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त किया, बल्कि समाज में सेवा और करुणा के संदेश को भी प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया।

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