गणेश चतुर्थी पर जयपुर में विशेष तैयारियां, 15 सितंबर को मोती डूंगरी से निकलेगी शोभायात्रा
जयपुर में गणेश चतुर्थी और शोभायात्रा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 15 सितंबर को मोती डूंगरी से शोभायात्रा निकलेगी। सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और भीड़ प्रबंधन के लिए विभागों को विशेष निर्देश दिए गए।
तस्वीर में जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर परिसर में जिला कलक्टर संदेश नायक और अन्य अधिकारी गणेश चतुर्थी व शोभायात्रा की तैयारियों को लेकर बैठक करते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर में गणेश चतुर्थी पर्व और 15 सितंबर को प्रस्तावित श्री गणेशजी की शोभायात्रा को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को श्री गणेशजी मंदिर, मोती डूंगरी परिसर में जिला कलक्टर संदेश नायक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने और आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए।
जिला कलक्टर ने बताया कि 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर्व पर जयपुर शहर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, ब्रह्मपुरी स्थित श्री गढ़गणेश मंदिर और नहर के गणेश मंदिर सहित शहर के अन्य भगवान गणेशजी के मंदिरों में पर्व भव्यता एवं दिव्यता से मनाया जाएगा। वहीं 15 सितंबर को शाम 4 बजे श्री गणेशजी की शोभायात्रा मोती डूंगरी गणेश मंदिर से रवाना होगी।
शोभायात्रा मोती डूंगरी रोड, सांगानेरी गेट, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी बाजार, चौगान चौराहा और ब्रह्मपुरी होते हुए श्री गढ़ गणेशजी मंदिर पहुंचेगी, जहां इसका विसर्जन होगा। शोभायात्रा के मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के एकत्रित होने की संभावना को देखते हुए जिला कलक्टर ने पुलिस एवं यातायात पुलिस को भीड़ प्रबंधन, पुलिस तैनाती, यातायात डायवर्जन और पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नगर निगम को सड़कों और मंदिरों के आसपास साफ-सफाई, रंगोली, कचरा प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था, प्रकाश एवं सजावट, पार्किंग, पेयजल, अग्निशमन और चल-शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वर्षा की स्थिति में एमडी रोड पर जलभराव होने पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित किया गया। जेडीए को फव्वारों, डिवाइडर एवं सड़कों की मरम्मत तथा पीडब्ल्यूडी को आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग और सड़कों के निर्माण एवं दुरुस्तीकरण की व्यवस्था करने को कहा गया।
चिकित्सा विभाग को एम्बुलेंस एवं मेडिकल टीम की समुचित व्यवस्था करने, संभावित आपदा की स्थिति में नजदीकी अस्पताल चिन्हित कर बेड रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए। जेवीवीएनएल को निर्बाध विद्युत आपूर्ति, ढीले तारों के दुरुस्तीकरण और कंट्रोल रूम की व्यवस्था करने को कहा गया। पीएचईडी को पेयजल एवं पानी की टोंटी-टैंकर व्यवस्था, आरटीओ को शोभायात्रा के लिए वाहनों का समयपूर्व अधिग्रहण कर आयोजकों को उपलब्ध कराने तथा दूरसंचार विभाग को नेटवर्क जाम की स्थिति का निवारण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में नागरिक सुरक्षा विभाग को संभावित आपदा से निपटने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती तथा पर्व से पूर्व मंदिरों का फायर ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए। देवस्थान विभाग को मंदिरों में सजावट एवं रोशनी की व्यवस्था तथा विद्युत निरीक्षक को विद्युत उपकरणों एवं केबलिंग की जांच कर प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए कहा गया।
जिला कलक्टर ने संयुक्त नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के साथ इसमें सभी विभागों के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के निर्देश भी दिए। मंदिर प्रबंधन को गणेश चतुर्थी के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश-निकासी, पेयजल, सुलभ सुविधाओं, नियंत्रण कक्ष, माइक सेट और सीसीटीवी सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। सभी विभागों को निर्धारित समय पर विभागवार तैयारियों की रिपोर्ट के साथ बैठक में उपस्थित रहने और आपसी समन्वय से व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर के महंत श्री कैलाश शर्मा ने बताया कि श्री गणेशजी मोती डूंगरी में 7 से 15 सितंबर तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। इसके तहत 7 सितंबर को कलश यात्रा एवं जलाभिषेक, 8 सितंबर को पुष्प नक्षत्र पंचामृत अभिषेक एवं विशेष केले की झांकी तथा ध्रुपद गायन, 9 सितंबर को मोदक की झांकी, 10 सितंबर को भगवान श्री के फलों की झांकी, 11 सितंबर को भगवान श्री की सब्जियों की झांकी, 12 सितंबर को भगवान श्री के फूलों की झांकी, 13 सितंबर को मेहंदी पूजन एवं सिंजारा तथा 14 सितंबर को मंगला आरती, श्रृंगार आरती, भोग आरती, संध्या आरती एवं शयन आरती के आयोजन होंगे। 15 सितंबर को शाम 4 बजे शोभायात्रा निकाली जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रदीप मोहन, डीसीपी यातायात योगेश बंसल, अतिरिक्त जिला कलक्टर दक्षिण युगांतर शर्मा सहित संबंधित विभागों एवं मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन ने पर्व और शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़, यातायात, सुरक्षा, बिजली, चिकित्सा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।